महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, शरद पवार की NCP के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने को लेकर गंभीर स्तर पर चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि अगले 8 से 15 दिनों के भीतर इस पर अंतिम फैसला हो सकता है।
NDA में शामिल होने के दो प्रमुख विकल्प
सूत्रों के मुताबिक फिलहाल दो प्रमुख फॉर्मूलों पर चर्चा चल रही है।
- पहला फॉर्मूला यह है कि अजित पवार की NCP और शरद पवार की NCP का विलय (मर्जर) कराया जाए और उसके बाद एकजुट होकर NDA में शामिल हुआ जाए।
- दूसरा फॉर्मूला यह है कि यदि मर्जर संभव नहीं हो पाता, तो शरद पवार की NCP अलग राजनीतिक इकाई के रूप में NDA से जुड़े या सरकार को भीतर अथवा बाहर से समर्थन दे।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि शरद पवार गुट के अधिकांश विधायक और सांसद सीधे NDA में शामिल होने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि केंद्र और महाराष्ट्र, दोनों सरकारों में भागीदारी मिलने से संगठन मजबूत होगा, कार्यकर्ताओं और कैडर का मनोबल बना रहेगा तथा पार्टी का विस्तार भी आसान होगा। सूत्रों के मुताबिक यदि पार्टी केवल बाहर से समर्थन देती है तो उसका राजनीतिक लाभ सीमित रहेगा। ऐसे में कई विधायक और सांसद भाजपा के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व के संपर्क में भी बताए जा रहे हैं। यदि निर्णय में देरी होती है तो भविष्य में टूट की संभावना भी बनी रह सकती है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर सीधे NDA में शामिल होने के पक्ष में माहौल मजबूत बताया जा रहा है।
अजित पवार की NCP में दो धड़ों की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार की NCP के भीतर भी दो धड़े सक्रिय हैं। एक ओर सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का गुट है, जबकि दूसरी ओर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे का गुट है। बताया जा रहा है कि अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से उनकी और पार्थ पवार की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा है। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे स्वयं को उपेक्षित और असहज महसूस कर रहे हैं। इसका एक उदाहरण तब सामने आया जब चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का नाम शामिल नहीं किया गया। विवाद के बाद सुधार का आश्वासन दिया गया, लेकिन सूत्रों का दावा है कि उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई विधायक भी पार्थ पवार की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं और यही नाराजगी प्रफुल्ल पटेल तथा सुनील तटकरे खेमे में भी दिखाई दे रही है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार भी बना विवाद का कारण
सूत्रों के मुताबिक भविष्य में यदि केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो सुनेत्रा पवार गुट चाहता है कि प्रफुल्ल पटेल की जगह पार्थ पवार को मंत्री बनाया जाए। इस मांग से भी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा है। हाल ही में सचिनानंद सिंह द्वारा लिखे गए एक पत्र में सुनेत्रा पवार की नियुक्ति को अवैध बताया गया। सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार गुट का आरोप है कि इसके पीछे प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे खेमे की भूमिका है। इसके अलावा सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार चाहते हैं कि प्रफुल्ल पटेल संगठन और सरकार में से केवल एक ही जिम्मेदारी संभालें। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर भी प्रफुल्ल पटेल नाराज हैं।
शरद पवार से बढ़े संपर्क
इन्हीं परिस्थितियों के बीच प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की शरद पवार से मुलाकातें और संपर्क बढ़े हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेता कुछ विधायकों को साथ लेकर पुरानी NCP को फिर से एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि पार्टी का संगठन मजबूत रहे और उनका राजनीतिक महत्व भी बना रहे।
मर्जर का विरोध क्यों?
दूसरी ओर, सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार मर्जर के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें आशंका है कि यदि दोनों NCP का विलय हुआ तो प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पहले से ही उनके विरोध में हैं। ऐसे में सुप्रिया सुले और शरद पवार गुट के विधायक-सांसद भी साथ आ गए तो संगठन की कमान उनके हाथ से निकल सकती है। इसी वजह से वे मर्जर का विरोध कर रहे हैं। वहीं सुप्रिया सुले भी संकेत दे चुकी हैं कि मर्जर की संभावना फिलहाल समाप्त हो चुकी है, क्योंकि सामने वाले पक्ष की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली और वे अपना सम्मान गिरवी नहीं रख सकतीं।
भाजपा की क्या रणनीति है?
सूत्रों के अनुसार, भाजपा चाहती है कि दोनों NCP एक साथ NDA में आएं। यदि दोनों अलग-अलग रहते हैं और अजित पवार की पार्टी के भीतर भी गुटबाजी बनी रहती है तो राज्य और केंद्र में समन्वय की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। भाजपा की एक बड़ी चिंता यह भी बताई जा रही है कि अजित पवार के बाद उसके पास ऐसा प्रभावी सेक्युलर चेहरा नहीं है जो कांग्रेस और विपक्ष के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सके। ऐसे में शरद पवार, सुप्रिया सुले और उनके सहयोगियों जैसे नेताओं का NDA से जुड़ना भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है।
हालांकि भाजपा यह भी मानती है कि अजित पवार ने कठिन समय में शरद पवार से अलग होकर NDA का साथ दिया था। इसलिए अब उनकी अनुपस्थिति में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को पूरी तरह अलग-थलग छोड़ना गलत संदेश दे सकता है। इसी वजह से भाजपा दोनों पक्षों के बीच सहमति बनवाने की कोशिश कर रही है।
अगर मर्जर नहीं हुआ तो क्या होगा?
सूत्रों के अनुसार, यदि दोनों NCP के बीच मर्जर पर सहमति नहीं बनती है, तो दूसरे विकल्प के तहत शरद पवार की NCP अपने अलग राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखते हुए NDA से जुड़ सकती है। बताया जा रहा है कि अधिकांश विधायक और सांसद चाहते हैं कि पार्टी सीधे सत्ता का हिस्सा बने। उनका मानना है कि सत्ता में रहकर ही संगठन मजबूत होगा, कार्यकर्ता और कैडर जुड़े रहेंगे तथा पार्टी का राजनीतिक विस्तार संभव होगा। इसी वजह से अलग गुट के रूप में भी NDA में शामिल होने का विकल्प गंभीरता से विचाराधीन है। इसके लिए अजित पवार की NCP को भी सहमत कराने की कोशिश जारी है।
यदि इस विकल्प पर भी सहमति नहीं बनती है, तो अंतिम विकल्प के तौर पर शरद पवार की NCP NDA को बाहर से समर्थन दे सकती है। यानी सरकार में शामिल हुए बिना संसद और विधानसभा में आने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों तथा सरकार के प्रमुख फैसलों पर अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन कर सकती है। एक विकल्प यह भी चर्चा में आया था कि यदि अजित पवार की NCP के साथ मर्जर नहीं होता, तो शरद पवार गुट के विधायक और सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जुड़कर NDA का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को ज्यादा समर्थन नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि स्वयं शरद पवार, सुप्रिया सुले और अधिकांश विधायक-सांसदों का मानना है कि उनकी राजनीतिक विचारधारा और कार्यशैली शिवसेना के साथ सीधे जुड़ने से मेल नहीं खाती। इसलिए इस विकल्प पर फिलहाल ज्यादा जोर नहीं दिया जा रहा है। फिलहाल सबसे बड़ा प्रयास यही है कि दोनों NCP का विलय कराया जाए और उसके बाद एकजुट होकर NDA में शामिल हुआ जाए। यदि मर्जर संभव नहीं होता, तो शरद पवार की NCP अलग इकाई के रूप में NDA से जुड़ सकती है।
दिल्ली में होने वाली NDA की बैठकों पर सबकी नजर
सूत्रों के अनुसार, इस संभावित व्यवस्था में केंद्र की राजनीति में सुप्रिया सुले और महाराष्ट्र में जयंत पाटिल को प्रमुख भूमिका मिल सकती है तथा दोनों सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। अब सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली NDA की बैठकों और महाराष्ट्र में होने वाली महायुति की आंतरिक राजनीतिक बैठकों पर हैं। इन बैठकों के बाद अगले कुछ दिनों में तस्वीर और स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि शरद पवार की NCP आने वाले दिनों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से NDA के साथ जाने का फैसला कर सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय दोनों NCP, NDA नेतृत्व और आगामी बैठकों के बाद ही स्पष्ट होगा।
वहीं, आपको बता दें कि दिवंगत अजित पवार और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार को केंद्र मंत्रिमंडल में जगह दिलाने को लेकर NCP की तरफ से लॉबिंग शुरू हो गई है।
यह भी पढ़ें-
"दादा जो चाहते थे, नहीं हुआ", अजित पवार को याद कर भावुक हुईं सुप्रिया सुले, जानें क्या कहा?