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Explainer: अमेरिका और ईरान में कौन जीता युद्ध? फंसेगी डील या हो जाएगा समझौता, जानें समीकरण

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Jun 17, 2026 01:57 pm IST,  Updated : Jun 17, 2026 02:31 pm IST

ईरान और अमेरिका जेनेवा में शांति प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर लगाएंगे। किन मुद्दों पर सहमति बनी और शांति प्रस्ताव में क्या है। ईरान और अमेरिका दोनों में से कितना जीता युद्ध और होर्मुज को लेकर क्यों फंस रहा पेंच? जानिए इस एक्सप्लेनर में....

अमेरिका या ईरान, कौन जीता युद्ध?- India TV Hindi
अमेरिका या ईरान, कौन जीता युद्ध? Image Source : FILE PHOTO

Explainer: ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल युद्ध थमा हुआ है और शांति  प्रस्ताव पर अगर मुहर लग गई तो पूरी दुनिया के लिए यह बड़ी बात होगी। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते से युद्ध लगभग समाप्त हो गया है, और भारी नुकसान के बावजूद दोनों पक्ष जीत का दावा कर रहे हैं। अब दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर जेनेवा में 19 जून को हस्ताक्षर हो जाए तो ये बड़ी बात होगी। हालांकि शांति समझौता तो ऐसा है कि लग रहा है, शादी की रस्म तो हो गई है, लेकिन अंगूठी अभी तक नहीं दिखी है। यह बात उन लोगों ने कही है जो सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुई उस अहम "डील-टू-डू-अ-डील"  पर नज़र रखे हुए थे।

अमेरिका-ईरान समझौते में क्या-क्या शामिल है?

अमेरिका और ईरान, दोनों में से किसी ने भी समझौते का पूरा टेक्स्ट जारी नहीं किया है, लेकिन अमेरिका और सऊदी मीडिया के अनुसार:

  • इस समझौते में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही, दोनों पक्षों ने वादा किया है कि "अब से वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई भी आक्रामक कार्रवाई नहीं करेंगे"।
     
  • अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर आसपास के इलाकों से अपनी सेना हटाने का वादा करता है।
     
  • ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही की अनुमति देने के लिए तुरंत कदम उठाएगा।
     
  • अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए एक "व्यापक योजना" बनाएंगे और कम से कम 300 अरब डॉलर की फंडिंग सुनिश्चित करेंगे।
     
  • अमेरिका ईरान पर लगे सभी तरह के प्रतिबंधों को खत्म करने का वादा करता है, जिसमें UN सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंध भी शामिल हैं, और यह काम "अंतिम समझौते के तहत तय किए गए शेड्यूल के अनुसार" किया जाएगा।
     
  • ईरान ने फिर दोहराया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और उसके संवर्धित पदार्थ (enriched material) व अन्य मुद्दों पर अंतिम समझौते में फैसला किया जाएगा।
     
  • अमेरिका प्रतिबंध हटने की तारीख तक ईरानी तेल निर्यात के लिए छूट देगा।
     
  • अमेरिका "अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत की प्रगति को देखते हुए" ईरान के फ्रीज़ किए गए फंड और संपत्ति को जारी करने का वादा करता है।

शांति समझौते के बाद भी क्यों बनी रहेगी चिंता?

अमेरिका और ईरान के बीच यह डील 100 से ज़्यादा दिनों तक चली उस लड़ाई के बाद हुई है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों से हुई थी। ट्रंप ने युद्ध को लेकर कहा था कि अगर ईरान को परमाणु हथियार मिले तो नरक बरसेगा। भले ही शुक्रवार को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच किसी फ्रेमवर्क समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर हो जाएं, लेकिन होर्मुज  के ज़रिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता एक बड़ी चिंता का कारण बनी रहेगी।

US-Iran MoU पर कब साइन करेंगे?

  •  US-Iran MoU पर आधिकारिक तौर पर साइन इस शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे।
     
  • स्विस विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कार्यक्रम ल्यूसर्न के पास बर्गनस्टॉक रिज़ॉर्ट में होगा।
     
  • इस समझौते का पूरा टेक्स्ट, जिस पर शुक्रवार को जिनेवा में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, अभी तक जारी नहीं किया गया है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में इसमें असल में क्या है, इसे लेकर मिली-जुली और अलग-अलग बातें सामने आई हैं।

MoU पर कौन साइन करेगा?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप, वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ पहले ही इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस डील पर साइन कर चुके हैं। ट्रंप का कहना है कि वेंस असली दस्तावेज़ पर साइन करेंगे, जबकि ईरानी मीडिया का कहना है कि ग़ालिबाफ़ ईरान का प्रतिनिधित्व करेंगे।

दस्तावेज़ में क्या है?
किसी भी पक्ष ने आधिकारिक टेक्स्ट जारी नहीं किया है, लेकिन अमेरिकी और सऊदी मीडिया का कहना है कि यह 14-पॉइंट वाला मेमोरेंडम है जिसमें सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने की बात कही गई है।

अमेरिका ने ईरान से क्या कहा?
अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि अगर ईरान परमाणु हथियार न बनाने, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखने और हथियारबंद समूहों को फंडिंग बंद करने जैसे काम करके "सही व्यवहार" करता है, तो उसे वॉशिंगटन-तेहरान समझौते के तहत "असली फ़ायदे" मिल सकते हैं। 

किन मुद्दों पर बनी सहमति, किन मुद्दों को टाला गया?

ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के ड्राफ्ट में दोनों पक्षों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके पास मौजूद 440 किलोग्राम (970 पाउंड) अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (highly enriched uranium) के भंडार के बारे में अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। न्यूज़ एजेंसी ने बताया है कि इस दौरान ईरान की फ्रीज़ की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति जारी की जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने इनमें से किसी भी बात की पुष्टि नहीं की है।

अमेरिका-ईरान में कौन जीता युद्ध?

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते से भले ही तीन महीने से ज़्यादा समय से चल रही लड़ाई खत्म हो गई हो, लेकिन इसने एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि इस युद्ध से अमेरिकी ताकत के बारे में क्या पता चला। अमेरिका और इज़राइल के पास इस लड़ाई में ज़बरदस्त सैन्य बढ़त थी। उनके विमानों, सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों, खुफिया नेटवर्क और मिसाइल सिस्टम की मदद से वे ईरान में मौजूद ठिकानों पर हमला कर पाए, जबकि उन्हें बहुत कम पारंपरिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। ईरान के नेतृत्व, सेना और परमाणु बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा।

ईरान के लिए खास क्यों है होर्मुज?

  • अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास अब जब चाहे तब 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को बंद करने की ताकत है।
     
  • समाचार एजेंसी सीएनएन के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से बताया कि US इंटेलिजेंस के एक आकलन में यह निष्कर्ष निकला है कि ईरान इस टकराव के बाद ऐसी क्षमता के साथ उभरा है जिससे वह जब चाहे 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' में रुकावट डाल सकता है या उसे बंद कर सकता है।
     
  • होर्मुज़ ईरान का सबसे ताकतवर मोल-भाव करने का ज़रिया बन गया है।
     
  •  अमेरिका और ईरान जिनेवा में अपने प्रस्तावित समझौता ज्ञापन के फ़्रेमवर्क समझौते के ऐलान के कुछ घंटों बाद, ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश ट्रांज़िट टोल नहीं लगाएगा, लेकिन जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों से समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क लेगा।
     
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने सोमवार को कहा, "हमने हमेशा यही कहा है कि हम ट्रांज़िट टोल वसूलना नहीं चाहते, लेकिन नेविगेशन सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, जहाज़ के बीमा और अन्य ज़रूरी सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाएगा।"

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