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गब्बर से लेकर जेलर तक... एक-एक कर 50 साल में दुनिया छोड़ गए 'शोले' के ये कलाकार, अब 'वीरू' ने भी कह दिया अलविदा

Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
Published : Nov 26, 2025 12:39 pm IST,  Updated : Nov 26, 2025 12:39 pm IST
भारतीय सिनेमा के इतिहास में 'शोले' एक ऐसी फिल्म है, जिसे कल्ट, कलासिक और बॉक्सऑफिस एंटरटेन का दर्जा मिला हुआ है। इस फिल्म की रिलीज को 50 साल पूरे हो गए हैं और फिल्म को कई सितारे अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। धर्मेंद्र और अमजद खान से लेकर असरानी और जगदीप तक, रामगढ़ को रोशन करने वाले और यादगार यादें छोड़ने वाले सितारों को यह एक प्यारी श्रद्धांजलि है।
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भारतीय सिनेमा के इतिहास में 'शोले' एक ऐसी फिल्म है, जिसे कल्ट, कलासिक और बॉक्सऑफिस एंटरटेन का दर्जा मिला हुआ है। इस फिल्म की रिलीज को 50 साल पूरे हो गए हैं और फिल्म को कई सितारे अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। धर्मेंद्र और अमजद खान से लेकर असरानी और जगदीप तक, रामगढ़ को रोशन करने वाले और यादगार यादें छोड़ने वाले सितारों को यह एक प्यारी श्रद्धांजलि है।
धर्मेंद्र ने ‘शोले’ में वीरू का किरदार निभाकर जय–वीरू की जोड़ी को अमर बना दिया। उनका मशहूर डायलॉग, 'बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना' आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार लाइनों में गिना जाता है। 24 नवंबर को 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
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धर्मेंद्र ने ‘शोले’ में वीरू का किरदार निभाकर जय–वीरू की जोड़ी को अमर बना दिया। उनका मशहूर डायलॉग, 'बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना' आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार लाइनों में गिना जाता है। 24 नवंबर को 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
अमजद खान ने फिल्म के सबसे डरावने और प्रभावशाली विलन गब्बर सिंह का रोल किया, एक ऐसा किरदार जिसे बॉलीवुड में आज तक कोई टक्कर नहीं दे पाया। अमजद खान का 1992 में देहांत हो गया।
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अमजद खान ने फिल्म के सबसे डरावने और प्रभावशाली विलन गब्बर सिंह का रोल किया, एक ऐसा किरदार जिसे बॉलीवुड में आज तक कोई टक्कर नहीं दे पाया। अमजद खान का 1992 में देहांत हो गया।
संजीव कुमार ने ठाकुर बलदेव सिंह बने थे, एक ऐसे इंसान, जो भीतर से टूट चुका था, पर बदला लेने की आग अब भी भीतर सुलग रही थी। उनका 1985 में मात्र 47 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
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संजीव कुमार ने ठाकुर बलदेव सिंह बने थे, एक ऐसे इंसान, जो भीतर से टूट चुका था, पर बदला लेने की आग अब भी भीतर सुलग रही थी। उनका 1985 में मात्र 47 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
असरानी ने अपनी अनोखी कॉमिक टाइमिंग के साथ फिल्म के जेलर का किरदार निभाया और कहानी में हल्की-फुल्की मुस्कान भर दी। 20 अक्टूबर 2025 को उनका निधन हुआ।
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असरानी ने अपनी अनोखी कॉमिक टाइमिंग के साथ फिल्म के जेलर का किरदार निभाया और कहानी में हल्की-फुल्की मुस्कान भर दी। 20 अक्टूबर 2025 को उनका निधन हुआ।
इफ्तेखार, जिन्हें अक्सर ‘मैन इन यूनिफॉर्म’ कहा जाता था, शोले में इंस्पेक्टर नर्मला के रूप में राधा के पिता की भूमिका में नज़र आए। उनकी उपस्थिति ने फिल्म को एक अलग संतुलन दिया। 1995 में उनका निधन हो गया।
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इफ्तेखार, जिन्हें अक्सर ‘मैन इन यूनिफॉर्म’ कहा जाता था, शोले में इंस्पेक्टर नर्मला के रूप में राधा के पिता की भूमिका में नज़र आए। उनकी उपस्थिति ने फिल्म को एक अलग संतुलन दिया। 1995 में उनका निधन हो गया।
सत्येन कप्पू ने ठाकुर के वफादार सेवक रामलाल की भूमिका निभाई, जिसकी निष्ठा और सरलता पूरी फिल्म में झलकती है। यह अनुभवी अभिनेता 2007 में दुनिया से रुखसत हो गया।
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सत्येन कप्पू ने ठाकुर के वफादार सेवक रामलाल की भूमिका निभाई, जिसकी निष्ठा और सरलता पूरी फिल्म में झलकती है। यह अनुभवी अभिनेता 2007 में दुनिया से रुखसत हो गया।
सांभा, गब्बर के साइलेंट लेकिन असरदार साथी के रूप में पहचाने जाने वाले अभिनेता मैक मोहन ने बहुत कम संवादों के बावजूद अपनी छाप छोड़ी। 2010 में उनका निधन हुआ।
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सांभा, गब्बर के साइलेंट लेकिन असरदार साथी के रूप में पहचाने जाने वाले अभिनेता मैक मोहन ने बहुत कम संवादों के बावजूद अपनी छाप छोड़ी। 2010 में उनका निधन हुआ।
एके हंगल ने इमाम साहब का मार्मिक किरदार निभाया। एक अंधे पिता का दर्द उनकी अदाकारी के ज़रिये आज भी दर्शकों को छू जाता है। 2012 में उनका देहांत हुआ।
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एके हंगल ने इमाम साहब का मार्मिक किरदार निभाया। एक अंधे पिता का दर्द उनकी अदाकारी के ज़रिये आज भी दर्शकों को छू जाता है। 2012 में उनका देहांत हुआ।
जगदीप ने सूरमा भोपाली बनकर फिल्म में शरारत, हंसी और मासूमियत का एक अलग ही रंग भर दिया। 2020 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा।
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जगदीप ने सूरमा भोपाली बनकर फिल्म में शरारत, हंसी और मासूमियत का एक अलग ही रंग भर दिया। 2020 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा।
लीला मिश्रा अपनी ‘मौसी’ की भूमिका के लिए आज भी याद की जाती हैं। उनका निधन 1988 में हुआ।
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लीला मिश्रा अपनी ‘मौसी’ की भूमिका के लिए आज भी याद की जाती हैं। उनका निधन 1988 में हुआ।
विजू खोटे ने कालिया का किरदार निभाया, जिसकी मशहूर लाइन 'सरदार, मैंने आपका नमक खाया है', आज भी फैंस को याद है। 2019 में उनका निधन हुआ।
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विजू खोटे ने कालिया का किरदार निभाया, जिसकी मशहूर लाइन 'सरदार, मैंने आपका नमक खाया है', आज भी फैंस को याद है। 2019 में उनका निधन हुआ।
केष्टो मुखर्जी ने जेल के चतुर और मजाकिया नाई हरिराम के किरदार से कॉमेडी का हल्का-फुल्का स्वाद जोड़ा। वे 1982 में इस दुनिया से विदा हो गए।
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केष्टो मुखर्जी ने जेल के चतुर और मजाकिया नाई हरिराम के किरदार से कॉमेडी का हल्का-फुल्का स्वाद जोड़ा। वे 1982 में इस दुनिया से विदा हो गए।
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