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शाहरुख खान का स्कूलमेट, फिल्मों में बड़ा नाम कमाने से चूका, म्यूजिक इंडस्ट्री का बना चमचमाता सितारा

Written By: Priya Shukla
Published : May 26, 2026 10:14 am IST,  Updated : May 26, 2026 11:02 am IST
इसमें कोई शक नहीं कि शाहरुख खान बॉलीवुड के बादशाह हैं, लेकिन उनके बचपन के एक स्कूलमेट भी हैं, जिन्होंने फिल्मों में नहीं म्यूजिक की दुनिया में अपना नाम बनया है और देश के सबसे चहेते सिंगर्स में से एक हैं। ये सिंगर कोई और नहीं इंडी-रॉक बैंड यूफोरिया के फाउंडर पलाश सेन हैं, जिनका किंग खान से काफी पुराना नाता है। शाहरुख खान और पलाश सेन, दोनों ने ही अपनी-अपनी इंडस्ट्री में सफलता हासिल की है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि पलाश सेन ने भी उसी प्रतिष्ठित कोलंबस स्कूल से पढ़ाई की है, जिससे शाहरुख खान ने की थी।
1/6 Image Source : Instagram/@instadhoom
इसमें कोई शक नहीं कि शाहरुख खान बॉलीवुड के बादशाह हैं, लेकिन उनके बचपन के एक स्कूलमेट भी हैं, जिन्होंने फिल्मों में नहीं म्यूजिक की दुनिया में अपना नाम बनया है और देश के सबसे चहेते सिंगर्स में से एक हैं। ये सिंगर कोई और नहीं इंडी-रॉक बैंड यूफोरिया के फाउंडर पलाश सेन हैं, जिनका किंग खान से काफी पुराना नाता है। शाहरुख खान और पलाश सेन, दोनों ने ही अपनी-अपनी इंडस्ट्री में सफलता हासिल की है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि पलाश सेन ने भी उसी प्रतिष्ठित कोलंबस स्कूल से पढ़ाई की है, जिससे शाहरुख खान ने की थी।
यूफोरिया से फैंस के दिलों पर राज करने वाले पलाश सेन ने भी दिल्ली के कोलंबस स्कूल से पढ़ाई की है और खास बात तो ये है कि पलाश स्कूल में शाहरुख खान के सीनियर थे। सिंगर, किंग खान के 1 साल सीनियर थे। पलाश कई बार खुलकर शाहरुख खान की तारीफ में बता चुके हैं कि वह कैसे हमेशा से बुद्धिमान थे और अपने सपनों को लेकर बिल्कुल स्पष्ट थे।
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यूफोरिया से फैंस के दिलों पर राज करने वाले पलाश सेन ने भी दिल्ली के कोलंबस स्कूल से पढ़ाई की है और खास बात तो ये है कि पलाश स्कूल में शाहरुख खान के सीनियर थे। सिंगर, किंग खान के 1 साल सीनियर थे। पलाश कई बार खुलकर शाहरुख खान की तारीफ में बता चुके हैं कि वह कैसे हमेशा से बुद्धिमान थे और अपने सपनों को लेकर बिल्कुल स्पष्ट थे।
शाहरुख के साथ पलाश सेन ने कई स्कूल प्ले में भी हिस्सा लिया था। शाहरुख खान गाना नहीं गा सकते थे, ऐसे में पलाश ने कई बार स्कूल के संगीत कार्यक्रमों और नाटकों के दौरान उनके लिए पर्दे के पीछे गाना गाते थे। पलाश बचपन से ही थिएटर और सिंगिंग से जुड़े थे, जबकि शाहरुख खान का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ एक्टिंग पर था।
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शाहरुख के साथ पलाश सेन ने कई स्कूल प्ले में भी हिस्सा लिया था। शाहरुख खान गाना नहीं गा सकते थे, ऐसे में पलाश ने कई बार स्कूल के संगीत कार्यक्रमों और नाटकों के दौरान उनके लिए पर्दे के पीछे गाना गाते थे। पलाश बचपन से ही थिएटर और सिंगिंग से जुड़े थे, जबकि शाहरुख खान का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ एक्टिंग पर था।
यंग डेज में जहां पलाश का पहला फोकस पढ़ाई पर था और उन्होंने मेडिकल पलाश की पढ़ाई की और ऑर्थोपेडिक्स में एमबीबीएस और एमएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में किस्मत आजमाने का फैसला लिया और बॉलीवुड में कदम रखा। उन्होंने मेघना गुलजार की 'फिलहाल...' (2002) से डेब्यू किया और तब्बू और सुष्मिता सेन के साथ लीड रोल निभाया। हालांकि, ये फिल्म ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई।
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यंग डेज में जहां पलाश का पहला फोकस पढ़ाई पर था और उन्होंने मेडिकल पलाश की पढ़ाई की और ऑर्थोपेडिक्स में एमबीबीएस और एमएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में किस्मत आजमाने का फैसला लिया और बॉलीवुड में कदम रखा। उन्होंने मेघना गुलजार की 'फिलहाल...' (2002) से डेब्यू किया और तब्बू और सुष्मिता सेन के साथ लीड रोल निभाया। हालांकि, ये फिल्म ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई।
बाद में पलाश सेन कुछ और फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन एक्टिंग करियर में कुछ खास सफलता नहीं मिली। तभी पलाश को एहसास होने लगा कि एक्टिंग उनका असली जुनून नहीं है और फिर उन्होंने एक्टिंग के पीछे भागना बंद कर दिया और सिंगिंग का दामन थाम लिया।
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बाद में पलाश सेन कुछ और फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन एक्टिंग करियर में कुछ खास सफलता नहीं मिली। तभी पलाश को एहसास होने लगा कि एक्टिंग उनका असली जुनून नहीं है और फिर उन्होंने एक्टिंग के पीछे भागना बंद कर दिया और सिंगिंग का दामन थाम लिया।
पलाश ने 1988 में अपना बैंड 'यूफोरिया' बनाया, जिसने इंडियन इंडिपेंडेंट म्यूजिक इंडस्ट्री में बदलाव लेकर आई। 1998 में उनका पहला एल्बम 'धूम' आया, जिसकी जबरदस्त सफलता के साथ, पलाश रातोंरात स्टार बन गए। उनके 'धूम पिचक' और 'मायरी' जैसे गानों को खूब पसंद किया गया और इसी के साथ यूफोरिया भारतीय इतिहास के सबसे बड़े और सबसे सफल म्यूजिक बैंड्स में से एक बन गया।
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पलाश ने 1988 में अपना बैंड 'यूफोरिया' बनाया, जिसने इंडियन इंडिपेंडेंट म्यूजिक इंडस्ट्री में बदलाव लेकर आई। 1998 में उनका पहला एल्बम 'धूम' आया, जिसकी जबरदस्त सफलता के साथ, पलाश रातोंरात स्टार बन गए। उनके 'धूम पिचक' और 'मायरी' जैसे गानों को खूब पसंद किया गया और इसी के साथ यूफोरिया भारतीय इतिहास के सबसे बड़े और सबसे सफल म्यूजिक बैंड्स में से एक बन गया।
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