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यूरिक एसिड के मरीज वर्कआउट रूटीन में शामिल करें जोड़ों को सुरक्षित रखने वाली ये आसान एक्सरसाइज़

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Jul 14, 2025 01:38 pm IST,  Updated : Jul 14, 2025 01:44 pm IST
यूरिक एसिड बढ़ने पर जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या आम है, जिसे गाउट भी कहते हैं। ऐसे में एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है ताकि जोड़ों पर ज़्यादा ज़ोर न पड़े। यहाँ कुछ बेहतरीन एक्सरसाइज़ बताई गई हैं जो यूरिक एसिड के मरीज़ों के लिए फ़ायदेमंद और सुरक्षित हैं
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यूरिक एसिड बढ़ने पर जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या आम है, जिसे गाउट भी कहते हैं। ऐसे में एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है ताकि जोड़ों पर ज़्यादा ज़ोर न पड़े। यहाँ कुछ बेहतरीन एक्सरसाइज़ बताई गई हैं जो यूरिक एसिड के मरीज़ों के लिए फ़ायदेमंद और सुरक्षित हैं
ब्रिस्क वॉक: यूरिक एसिड के मरीजों के लिए वॉक सबसे आसान और असरदार एक्सरसाइज़ है। वॉक करने से पूरे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है। आप अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे शुरुआत कर सकते हैं और फिर गति व दूरी बढ़ा सकते हैं।
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ब्रिस्क वॉक: यूरिक एसिड के मरीजों के लिए वॉक सबसे आसान और असरदार एक्सरसाइज़ है। वॉक करने से पूरे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है। आप अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे शुरुआत कर सकते हैं और फिर गति व दूरी बढ़ा सकते हैं।
तैराकी: तैराकी यूरिक एसिड के मरीज़ों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह जोड़ों पर बिल्कुल भी दबाव नहीं डालती। पानी में शरीर का वज़न कम महसूस होता है, जिससे जोड़ों पर ज़ोर नहीं पड़ता और आप आसानी से पूरे शरीर की कसरत कर पाते हैं। यह दिल के लिए भी बहुत अच्छी है।
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तैराकी: तैराकी यूरिक एसिड के मरीज़ों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह जोड़ों पर बिल्कुल भी दबाव नहीं डालती। पानी में शरीर का वज़न कम महसूस होता है, जिससे जोड़ों पर ज़ोर नहीं पड़ता और आप आसानी से पूरे शरीर की कसरत कर पाते हैं। यह दिल के लिए भी बहुत अच्छी है।
साइकिल चलाना: अगर आपके पास साइकिल है या आप जिम में स्टेशनरी साइकिल का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो यह भी एक अच्छा विकल्प है। इसमें जोड़ों पर ज़्यादा दबाव नहीं पड़ता और यह आपकी टांगों को मज़बूत बनाने के साथ-साथ हृदय स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है।
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साइकिल चलाना: अगर आपके पास साइकिल है या आप जिम में स्टेशनरी साइकिल का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो यह भी एक अच्छा विकल्प है। इसमें जोड़ों पर ज़्यादा दबाव नहीं पड़ता और यह आपकी टांगों को मज़बूत बनाने के साथ-साथ हृदय स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है।
योग और स्ट्रेचिंग: योग के कई आसन यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने और जोड़ों को लचीला बनाने में मदद कर सकते हैं। हल्की स्ट्रेचिंग भी जोड़ों को गतिशील बनाए रखने और अकड़न को कम करने में सहायक है। पवनमुक्तासन, भुजंगासन, गोमुखासन जैसे आसन लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।
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योग और स्ट्रेचिंग: योग के कई आसन यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करने और जोड़ों को लचीला बनाने में मदद कर सकते हैं। हल्की स्ट्रेचिंग भी जोड़ों को गतिशील बनाए रखने और अकड़न को कम करने में सहायक है। पवनमुक्तासन, भुजंगासन, गोमुखासन जैसे आसन लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।
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