Published : Jul 12, 2026 11:31 pm IST, Updated : Jul 12, 2026 11:34 pm IST
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ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को पीएम मोदी ने एक 'प्रीमियम कॉफी बॉक्स' गिफ्ट किया है। यह बॉक्स भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों की समृद्ध विविधता और उच्च गुणवत्ता को प्रदर्शित करता है। इसमें धुली (Washed), प्राकृतिक (Natural) और हनी (Honey) प्रक्रियाओं के माध्यम से तैयार की गई विशिष्ट स्वादों वाली कॉफी शामिल है। यह पर्यावरण के अनुकूल खेती और भारतीय कॉफी क्षेत्र के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रतिनिधित्व करती है।
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न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम को पीएम मोदी ने 'उत्तराखंडी टोपी' (पारंपरिक पहाड़ी टोपी) भेंट की। उच्च गुणवत्ता वाली ऊन से हस्तनिर्मित यह टोपी अपनी जीवंत बुनी हुई पट्टी के कारण हिमालयी पहचान और गरिमा का प्रतीक मानी जाती है। त्योहारों और पवित्र समारोहों में पहनी जाने वाली यह टोपी स्थानीय परंपराओं, कारीगरों के कौशल और भारत की मेहमाननवाज़ी की संस्कृति को बयां करती है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को दो बेहद खास उपहार भेंट किए। पहला है उत्तराखंड ऐपन आर्ट (भगवान शिव)। यह उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की एक पारंपरिक लोककला है, जिसे मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा त्योहारों के दौरान गेरू (टेराकोटा-लाल आधार) और बिस्वार (चावल के पेस्ट) का इस्तेमाल करके दीवारों और फर्श पर बनाया जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह कलाकृति ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है, जो भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत और स्थायी दोस्ती को प्रदर्शित करती है।
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इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को पारंपरिक रिपूसे सिल्वर डेकोरेटिव प्लेटगिफ्ट किया। पूरी तरह से हाथ से तैयार की गई इस चांदी की प्लेट पर रिपूसे और चेसिंग तकनीकों का शानदार इस्तेमाल किया गया है। इसके सेंटर में कमल का फूल है, जिसके चारों ओर हाथी, कलात्मक पेड़ और फूलों के बॉर्डर बने हैं। कमल जहां पवित्रता का प्रतीक है, वहीं हाथी ज्ञान, शक्ति और समृद्धि को दर्शाता है। यह प्लेट वन्यजीव संरक्षण के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
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इंडोनेशियाई संसद की अध्यक्ष पुआन महारानी को पीएम नरेंद्र मोदी ने पारंपरिक ओडिशा इकत गिफ्ट कियाष ओडिशा इकत, जिसे स्थानीय रूप से 'बांधा' के नाम से जाना जाता है, एक प्रतिष्ठित हथकरघा रेशम (सिल्क) परंपरा है, जो अपनी जटिल टाई-एंड-डाई (tie-and-dye) तकनीक और जीवंत डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध है। बुनाई से पहले धागों को बड़ी सावधानी से बांधकर और रंगकर तैयार किए जाने वाले इस कपड़े में समृद्ध बनावट, दोनों तरफ एक जैसे दिखने वाले पैटर्न और नरम, पंखदार किनारों वाले विशिष्ट घुमावदार रूपांकन (curvilinear motifs) होते हैं।
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ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को पीएम नरेंद्र मोदी ने जनजातीय ढोकरा नाव शिल्प भी गिफ्ट किया। प्राचीन 'लॉस्ट-वैक्स' (lost-wax) कास्टिंग तकनीक के माध्यम से तैयार की गई यह ढोकरा मूर्तिकला एक पारंपरिक नाव को दर्शाती है, जिसमें जनजातीय पुरुष और महिलाएं सवार हैं। यह कलाकृति एकता, सहयोग और सामूहिक प्रगति का प्रतीक है। भारत की सबसे पुरानी धातु शिल्प परंपराओं में से एक का प्रतिनिधित्व करने वाली ढोकरा कला, जनजातीय कारीगरों की समृद्ध विरासत को दर्शाती है जिन्होंने पीढ़ियों से इस जटिल कला रूप को सहेज कर रखा है।