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Navratri Kitni Hoti Hain: एक साल में कितने नवरात्र आते हैं? जानें कितनी बार मनाते हैं शक्ति साधना से जुड़ा ये पर्व

Written By: Arti Azad
Published : Mar 17, 2026 05:08 pm IST,  Updated : Mar 19, 2026 01:35 pm IST
Saal Mein Kitne Navratra Hote Hain: सनातन धर्म में मां भगवती दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। माना जाता है कि मां अंबे साधक के सभी कष्टों को दूर करके उनकी कामनाओं की पूर्ति करती हैं। इसी कारण शक्ति के उपासकों को नवरात्रि महापर्व का साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि साल में कितनी आती है? चलिए जानते हैं देवी दुर्गा की आराधना से जुड़ा यह पर्व साल में कितनी बार मनाया जाता है।
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Saal Mein Kitne Navratra Hote Hain: सनातन धर्म में मां भगवती दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। माना जाता है कि मां अंबे साधक के सभी कष्टों को दूर करके उनकी कामनाओं की पूर्ति करती हैं। इसी कारण शक्ति के उपासकों को नवरात्रि महापर्व का साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि साल में कितनी आती है? चलिए जानते हैं देवी दुर्गा की आराधना से जुड़ा यह पर्व साल में कितनी बार मनाया जाता है।
नवरात्रि महापर्व एक साल में 4 बार मनाया जाता है। देवी मां की साधना दो बार प्रकट रूप में और दो बार गुप्त रूप से की जाती है। चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। वहीं, आषाढ़ और माघ मास में आने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्रि कहलाती है। चैत्र नवरात्रि पर नए संवत्सर की शुरुआत होती है। जबकि, शारदीय नवरात्रि को देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने (बुराई पर अच्छाई की जीत) के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है।
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नवरात्रि महापर्व एक साल में 4 बार मनाया जाता है। देवी मां की साधना दो बार प्रकट रूप में और दो बार गुप्त रूप से की जाती है। चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। वहीं, आषाढ़ और माघ मास में आने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्रि कहलाती है। चैत्र नवरात्रि पर नए संवत्सर की शुरुआत होती है। जबकि, शारदीय नवरात्रि को देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने (बुराई पर अच्छाई की जीत) के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है।
चैत्र और आश्विन मास के नौ दिनों में साधक मां अंबे के 9 स्वरूपों: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं। आषाढ़ और माघ मास में देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों की नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी 10 महाविद्या की साधना अत्यंत ही गुप्त रूप से होती है। इन 10 महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
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चैत्र और आश्विन मास के नौ दिनों में साधक मां अंबे के 9 स्वरूपों: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं। आषाढ़ और माघ मास में देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों की नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी 10 महाविद्या की साधना अत्यंत ही गुप्त रूप से होती है। इन 10 महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
शीतकालीन नवरात्रि को माघ गुप्त नवरात्रि कहते हैं। यह हिंदू पंचांग के माघ महीने के शुक्ल पक्षमें प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। इसे पौष मास गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है। यह नवरात्रि तंत्र-मंत्र और गुप्त सिद्धियों की प्राप्ति के लिए जानी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान की गई साधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
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शीतकालीन नवरात्रि को माघ गुप्त नवरात्रि कहते हैं। यह हिंदू पंचांग के माघ महीने के शुक्ल पक्षमें प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। इसे पौष मास गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है। यह नवरात्रि तंत्र-मंत्र और गुप्त सिद्धियों की प्राप्ति के लिए जानी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान की गई साधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
चैत्र नवरात्रि में भी माता रानी के उपासना की जाती है। यह नवरात्रि भी गृहस्थ साधकों के लिए है। चैत्र नवरात्रि हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है, जो नवमी तिथि पर राम जन्मोत्सव के साथ समाप्त होती है। इन नौ दिनों में साधक व्रत रखकर देवी की पूजा करते हैं। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ देवी मां के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है।
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चैत्र नवरात्रि में भी माता रानी के उपासना की जाती है। यह नवरात्रि भी गृहस्थ साधकों के लिए है। चैत्र नवरात्रि हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है, जो नवमी तिथि पर राम जन्मोत्सव के साथ समाप्त होती है। इन नौ दिनों में साधक व्रत रखकर देवी की पूजा करते हैं। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ देवी मां के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है।
आषाढ़ नवरात्रि हर साल जून-जुलाई में मनाई जाती है। इसकी शुरुआत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। आषाढ़ नवरात्रि को भी गुप्त नवरात्र के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, तंत्र मंत्र सीखने वाले साधकों के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद महत्वपूर्ण होती है।
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आषाढ़ नवरात्रि हर साल जून-जुलाई में मनाई जाती है। इसकी शुरुआत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। आषाढ़ नवरात्रि को भी गुप्त नवरात्र के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, तंत्र मंत्र सीखने वाले साधकों के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद महत्वपूर्ण होती है।
हर साल आश्विन महीने में शारदीय नवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि आश्विन माह की प्रतिपदा को आरंभ होती है और आश्विन माह की नवमी को समाप्त होती है। दशमी तिथि पर दशहरा पर्व मनाया जाता है और इस दिन रावण दहन किया जाता है। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
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हर साल आश्विन महीने में शारदीय नवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि आश्विन माह की प्रतिपदा को आरंभ होती है और आश्विन माह की नवमी को समाप्त होती है। दशमी तिथि पर दशहरा पर्व मनाया जाता है और इस दिन रावण दहन किया जाता है। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
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