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Kharmas: कल से होगी खरमास की शुरुआत, जानें इस दौरान क्यों नहीं किए जाते शादी-गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य

Written By: Naveen Khantwal
Published : Dec 15, 2025 07:45 pm IST,  Updated : Dec 15, 2025 07:45 pm IST
खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 से हो रही है और अगले साल 14 जनवरी तक खरमास रहेगा। ये 1 महीने का वो समयकाल होता है जब शुभ मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। इस दौरान शादी, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कार्य नहीं किए जाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं इसका कारण क्या है। आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देंगे।
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खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 से हो रही है और अगले साल 14 जनवरी तक खरमास रहेगा। ये 1 महीने का वो समयकाल होता है जब शुभ मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। इस दौरान शादी, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कार्य नहीं किए जाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं इसका कारण क्या है। आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देंगे।
खरमास तब शुरू होता है जब सूर्य ग्रह बृहस्पति ग्रह की राशियों धनु या मीन में संचार करते हैं। 16 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भी सूर्य धनु की राशि में जाते हैं तो सूर्य का तेज क्षीण हो जाता है। सूर्य ग्रह को ज्योतिष में राजा का दर्जा प्राप्त है और साथ ही आत्मा के कारक भी सूर्य ग्रह हैं। ऐसे में सूर्य की क्षीण अवस्था में अगर आप कोई शुभ मांगलिक कार्य करते हैं तो परेशानियां आपके जीवन में आ सकती हैं। शुभ कार्यों के दौरान सूर्य का अच्छी स्थिति में होना आवश्यक होता है। यही वजह है कि खरमास के दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते।
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खरमास तब शुरू होता है जब सूर्य ग्रह बृहस्पति ग्रह की राशियों धनु या मीन में संचार करते हैं। 16 दिसंबर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भी सूर्य धनु की राशि में जाते हैं तो सूर्य का तेज क्षीण हो जाता है। सूर्य ग्रह को ज्योतिष में राजा का दर्जा प्राप्त है और साथ ही आत्मा के कारक भी सूर्य ग्रह हैं। ऐसे में सूर्य की क्षीण अवस्था में अगर आप कोई शुभ मांगलिक कार्य करते हैं तो परेशानियां आपके जीवन में आ सकती हैं। शुभ कार्यों के दौरान सूर्य का अच्छी स्थिति में होना आवश्यक होता है। यही वजह है कि खरमास के दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते।
वहीं सूर्य के गुरु की राशि में प्रवेश करने से गुरु ग्रह की शक्ति पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। गुरु की शक्ति क्षीण हो जाती है और ऐसे में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। शुभ-मांगलिक कार्यों को करने के लिए गुरु का मजबूत होना भी बेहद आवश्यक होता है। गुरु की शुभ स्थिति से ही मांगलिक कार्यों से हमें शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसलिए सूर्य के गुरु की राशि में प्रवेश करने बाद शुभ कार्य बंद हो जाते हैं।
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वहीं सूर्य के गुरु की राशि में प्रवेश करने से गुरु ग्रह की शक्ति पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। गुरु की शक्ति क्षीण हो जाती है और ऐसे में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। शुभ-मांगलिक कार्यों को करने के लिए गुरु का मजबूत होना भी बेहद आवश्यक होता है। गुरु की शुभ स्थिति से ही मांगलिक कार्यों से हमें शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसलिए सूर्य के गुरु की राशि में प्रवेश करने बाद शुभ कार्य बंद हो जाते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव के रथ के घोड़े थक जाते हैं तो खर यानि गधे उनके रथ को चलाते हैं जिसके कारण सूर्य देव के रथ की गति कम हो जाती है। सूर्य के मीन और धनु राशि में होने के दौरान ही सूर्य देव के रथ को गधों के द्वारा चलाया जाता है इसलिए इसे खर मास कहते हैं। सूर्य की धीमी गति मांगलिक कार्यों के लिए अच्छी नहीं होती इसलिए मांगलिक कार्य वर्जित कर दिए जाते हैं।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव के रथ के घोड़े थक जाते हैं तो खर यानि गधे उनके रथ को चलाते हैं जिसके कारण सूर्य देव के रथ की गति कम हो जाती है। सूर्य के मीन और धनु राशि में होने के दौरान ही सूर्य देव के रथ को गधों के द्वारा चलाया जाता है इसलिए इसे खर मास कहते हैं। सूर्य की धीमी गति मांगलिक कार्यों के लिए अच्छी नहीं होती इसलिए मांगलिक कार्य वर्जित कर दिए जाते हैं।
खरमास के दौरान विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण, नया वाहन या संपत्ति खरीदना, नया बिजनेस शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता। इन शुभ कार्यों को खरमास के दौरान करने से अशुभ फल आपको मिल सकते हैं, इसलिए इन कार्यों को न करना ही बेहतर रहता है। खरमास में योग-ध्यान, सूर्य उपासना करने से शुभ फलों की प्राप्ति आपको हो सकती है।
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खरमास के दौरान विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश, नामकरण, नया वाहन या संपत्ति खरीदना, नया बिजनेस शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता। इन शुभ कार्यों को खरमास के दौरान करने से अशुभ फल आपको मिल सकते हैं, इसलिए इन कार्यों को न करना ही बेहतर रहता है। खरमास में योग-ध्यान, सूर्य उपासना करने से शुभ फलों की प्राप्ति आपको हो सकती है।
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