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राधा रानी की कौन हैं 8 प्रिय सखियां? यहां जानें उनके नाम

माना जाता है कि बिना अष्टसखियों की कृपा के श्री राधा-कृष्ण कृपा प्राप्त करना असंभव है। तो यहां जानिए कि राधा रानी की आठ प्रिय सखियों के क्या नाम हैं।

Written By: Vineeta Mandal
Published : Sep 19, 2026 11:20 pm IST,  Updated : Sep 19, 2026 11:20 pm IST
हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। यह पावन दिन श्री राधा रानी के प्राकट्य (जन्मोत्सव) उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखकर श्रीजी के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, मधुरता और समृद्धि आती है।
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हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। यह पावन दिन श्री राधा रानी के प्राकट्य (जन्मोत्सव) उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखकर श्रीजी के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, मधुरता और समृद्धि आती है।
हिंदू धर्म में राधा रानी और भगवान कृष्ण की भक्ति उनके गोपियों और सखियों के बिना अधूरी मानी जाती है। राधा रानी के साथ हमेशा उनकी आठ प्रिय सखियां विराजमान रहती हैं। इन्हें लाडली जी की अष्टसखी के रूप में पूजा जाता है। इन्हें राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं में सहयोग करने वाली प्रमुख सेविकाओं के रूप में भी देखा जाता है। तो आइए जानते हैं राधा रानी की प्रिय आठ सखियों के नाम।
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हिंदू धर्म में राधा रानी और भगवान कृष्ण की भक्ति उनके गोपियों और सखियों के बिना अधूरी मानी जाती है। राधा रानी के साथ हमेशा उनकी आठ प्रिय सखियां विराजमान रहती हैं। इन्हें लाडली जी की अष्टसखी के रूप में पूजा जाता है। इन्हें राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं में सहयोग करने वाली प्रमुख सेविकाओं के रूप में भी देखा जाता है। तो आइए जानते हैं राधा रानी की प्रिय आठ सखियों के नाम।
बरसाने की लाडली श्री राधा रानी की सखी में ललिता देवी को प्रमुख माना जाता है। ललिता जी राधा रानी की अत्यंत प्रिय सखी मानी जाती हैं।
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बरसाने की लाडली श्री राधा रानी की सखी में ललिता देवी को प्रमुख माना जाता है। ललिता जी राधा रानी की अत्यंत प्रिय सखी मानी जाती हैं।
लाडली जी की दूसरी सखी का नाम विशाखा है। विशाखा सखी राधा रानी और भगवान कृष्ण के बीच प्रेम संदेंशों के आदान-प्रदान में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
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लाडली जी की दूसरी सखी का नाम विशाखा है। विशाखा सखी राधा रानी और भगवान कृष्ण के बीच प्रेम संदेंशों के आदान-प्रदान में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
चंपकलता सखी स्वभाव से अत्यंत सरल और मधुर मानी जाती हैं। इन्हें फूलों की माला बनाना और निकुंज को सजाने में सहयोग करना उनकी प्रमुख सेवाओं में माना जाता है।
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चंपकलता सखी स्वभाव से अत्यंत सरल और मधुर मानी जाती हैं। इन्हें फूलों की माला बनाना और निकुंज को सजाने में सहयोग करना उनकी प्रमुख सेवाओं में माना जाता है।
चित्र सखी को कला, सौंदर्य और संगीत में अत्यंत निपुण माना जाता है। इन्हें वस्त्र, आभूषण और रंगों के सुंदर संयोजन में उनकी विशेष दक्षता बताया गया है।
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चित्र सखी को कला, सौंदर्य और संगीत में अत्यंत निपुण माना जाता है। इन्हें वस्त्र, आभूषण और रंगों के सुंदर संयोजन में उनकी विशेष दक्षता बताया गया है।
इंदुलेखा सखी को बुद्धिमान और चतुर माना जाता है। राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी योजनाओं और विभिन्न सेवाओं को व्यवस्थित करने में उनकी विशेष भूमिका बताया गया है।
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इंदुलेखा सखी को बुद्धिमान और चतुर माना जाता है। राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी योजनाओं और विभिन्न सेवाओं को व्यवस्थित करने में उनकी विशेष भूमिका बताया गया है।
रंगदेवी सखी का स्वाभान चंचल और हंसमुख माना जाता है। रास लीलाओं की तैयारियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
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रंगदेवी सखी का स्वाभान चंचल और हंसमुख माना जाता है। रास लीलाओं की तैयारियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
तुंगविद्या सखी को विभिन्न विद्याओं में निपुण माना जाता है। इन्हें वेद, उपनिषद, नृत्य, संगीतशास्त्र, कलाओं और काव्य रचना का अगाध ज्ञान है। राधा-कृष्ण की लीलाओं में संगीत और सांस्कृतिक सेवाओं से उनका विशेष संबंध बताया जाता है।
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तुंगविद्या सखी को विभिन्न विद्याओं में निपुण माना जाता है। इन्हें वेद, उपनिषद, नृत्य, संगीतशास्त्र, कलाओं और काव्य रचना का अगाध ज्ञान है। राधा-कृष्ण की लीलाओं में संगीत और सांस्कृतिक सेवाओं से उनका विशेष संबंध बताया जाता है।
सुदेवी सखी, रंगदेवी जी जुड़वा बहन मानी जाती हैं। इनका स्वभाव अत्यंत दयालु और सेवाभावी है। गौ सेवा और प्रकृति से जुड़ी सेवाओं में उनकी विशेष रूचि मानी जाती है।
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सुदेवी सखी, रंगदेवी जी जुड़वा बहन मानी जाती हैं। इनका स्वभाव अत्यंत दयालु और सेवाभावी है। गौ सेवा और प्रकृति से जुड़ी सेवाओं में उनकी विशेष रूचि मानी जाती है।
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