क्रिकेट में गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होता है कि गेंद तो डालना है मगर नो बॉल कतई नहीं फेंकना है। हलांकि इसके बावजूद भारतीय क्रिकेट टीम में स्पिनरों के मुकाबले तेज गेंदबाजों ने नो बॉल ज्यादा फेंकी है। ख़ास मैचों में टीम की जरूरत के समय भी कुछ गेंदबाजों ने नो बॉल फेंकी जिससे टीम इंडिया को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।
इस कड़ी में सबसे पहले नाम आता है टीम इंडिया के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह का, 2017 की चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज फखर जमान के खिलाफ बुमराह का पाँव क्रीज से बाहर था। विकेट के पीछे जमान को चौथे ओवर में तीन रन पर कैच कर लिया गया था लेकिन यह नों बॉल थी। इस गेंद के कारण फखर जमान ने शतक जड़ा और भारत को मैच में 180 रन से हार का सामना करना पड़ा था। जिससे बुमराह की काफी आलोचना हुई।
साल 2016 के वर्ल्ड टी20 में भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दो विकेट पर 192 का मजबूत स्कोर खड़ा किया था। वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी के दौरान ओपनर बल्लेबाज लेंडल सिमंस 18 रन पर शॉर्ट थर्ड मैन पर खड़े जसप्रीत बुमराह के हाथों कैच हुए। अम्पायर ने बल्लेबाज को रुकने के लिए कहा और नो बॉल चेक की। अश्विन का पाँव क्रीज से बाहर था और यह एक नो बॉल थी। इसके बाद लेंडल सिमंस ने 82 रन बनाए और भारत को मैच में हार का सामना करना पड़ा था।
इस कड़ी में अंत में नाम आता है हार्दिक पांड्या का, इन्होने भी टी20 विश्वकप 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ नो बॉल फेंकी। पांड्या ने उसी लेंडल सिमंस को अश्विन के हाथों कैच कराया था जिसे पहली बार 18 रन पर नो बॉल से जीवनदान मिला था। इस बार सिमंस 50 रन पर खेल रहे थे। मगर फिर नो बॉल के कारण सिमंस को बचने का मौका मिल गया और भारत के लिए यह गेंद भारी पड़ी।