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CBSE क्लास 6 के छात्रों को बड़ी राहत! थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 28, 2026 04:35 pm IST,  Updated : Sep 28, 2026 05:24 pm IST

CBSE के 'थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले' से कक्षा 6 के छात्रों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को निर्देश दिया है कि वर्तमान कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों की तरह ही इस नीति के तहत छूट दी जाए।

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सुप्रीम कोर्ट Image Source : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को निर्देश दिया है कि अभी कक्षा 6 में पढ़ रहे छात्रों को भी तीन-भाषा नीति (थ्री लैंग्वेज पॉलिसी) से वही छूट दी जाए, जो पहले से कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को मिली हुई है। केंद्र सरकार का कहना था कि वह कक्षा 6 को छूट देने के पक्ष में नहीं है और करीब 99% CBSE स्कूल इस नीति को लागू करने के लिए तैयार हैं। लेकिन इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को भी छूट देने का निर्देश दिया।

दरअसल, इसे लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब 2026-27 के सत्र से कक्षा 6 में तीन भाषाओं की व्यवस्था लागू की गई।

1 अप्रैल 2027 से लागू होगी पॉलिसी

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से 2027 से शुरू होने वाले अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 के छात्रों के लिए दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने की नीति लागू करने पर विचार करने को कहा था। CBSE की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को बताया था कि बोर्ड इस सुझाव पर विचार करेगा।

जस्टिस बागची ने कहा था कि बच्चों को राहत देने के लिए सीबीएसई को अगले शैक्षणिक सत्र से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने को टालने पर विचार करना चाहिए। जस्टिस बागची ने कहा कि यदि वर्तमान में कक्षा छह में पढ़ रहे छात्र इस वर्ष से तीन भाषाओं का अध्ययन करना चाहते हैं तो उन्हें इसकी अनुमति दी जा सकती है। भाटी ने कहा था कि सीबीएसई इस सुझाव पर विचार करेगा और इस मुद्दे पर नया नोट पेश करेगा। 

थ्री लैंग्वेज पॉलिसी विवाद क्या है?

बता दें कि CBSE की नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के तहत तीन भाषाओं की पढ़ाई से जुड़ी है। कक्षा 6 से स्टूडेंट्स के लिए R1, R2 और  R3 के तहत तीन भाषाओं की व्यवस्था (थ्री लैंग्वेज पॉलिसी) लागू की जा रही है। CBSE के दिशानिर्देशों में कम से कम 2 भारतीय भाषाओं को शामिल करने की बात कही गई है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों के लिए यह व्यवस्था नए शैक्षणिक सत्र में लागू की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में कहा गया कि कई बच्चे चौथी कक्षा से ही अपनी पसंद की भाषाएं पढ़ रहे हैं ऐसे में कक्षा 6 में अचानक भाषा बदलने से उन्हें परेशानी हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर कोर्ट ने पहले भी चिंता जताई थी।

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