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पानी सुखाने की कीमत चुका रहा हंगरी, सूखे ने खोली दशकों पुरानी गलती की पोल; देखें तस्वीरें

Written By: Vineet Kumar Singh
Published : Aug 21, 2026 06:40 pm IST,  Updated : Aug 21, 2026 07:48 pm IST
हंगरी की तीसरी सबसे बड़ी झील लेक वेलेंस में पानी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। मछुआरे अर्पाड सेलमेसी ने बताया कि पानी घटकर करीब 20 सेंटीमीटर रह गया है, जबकि अगस्त में इसका बेहतर स्तर 150 सेंटीमीटर माना जाता है। इस झील में नाव चलाना भी मुश्किल हो गया है और कभी पर्यटकों से भरे रहने वाले स्विमिंग बीच बंद हैं। 58 साल के सेलमेसी कहते हैं, 'मैं बचपन से यहां रह रहा हूं, लेकिन पानी इतना कम कभी नहीं देखा। हर पल मेरा दिल दुखता है।'
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हंगरी की तीसरी सबसे बड़ी झील लेक वेलेंस में पानी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। मछुआरे अर्पाड सेलमेसी ने बताया कि पानी घटकर करीब 20 सेंटीमीटर रह गया है, जबकि अगस्त में इसका बेहतर स्तर 150 सेंटीमीटर माना जाता है। इस झील में नाव चलाना भी मुश्किल हो गया है और कभी पर्यटकों से भरे रहने वाले स्विमिंग बीच बंद हैं। 58 साल के सेलमेसी कहते हैं, 'मैं बचपन से यहां रह रहा हूं, लेकिन पानी इतना कम कभी नहीं देखा। हर पल मेरा दिल दुखता है।'
यह संकट सिर्फ एक झील तक सीमित नहीं है। हंगरी की करीब 99 फीसदी जमीन इस समय गंभीर या बेहद गंभीर सूखे की चपेट में है और ग्रेट हंगेरियन प्लेन में मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ रहा है। यूरोप में लंबे सूखे, भीषण गर्मी और जंगलों की आग ने हालात बिगाड़े हैं। मानव गतिविधियों से बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश कम होने के साथ-साथ हंगरी की पुरानी वॉटर मैनेजमेंट पॉलिसी भी जिम्मेदार मानी जा रही है। देश ने प्राकृतिक दलदलों का पानी निकालकर खेती के लिए जमीन तैयार की थी।
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यह संकट सिर्फ एक झील तक सीमित नहीं है। हंगरी की करीब 99 फीसदी जमीन इस समय गंभीर या बेहद गंभीर सूखे की चपेट में है और ग्रेट हंगेरियन प्लेन में मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ रहा है। यूरोप में लंबे सूखे, भीषण गर्मी और जंगलों की आग ने हालात बिगाड़े हैं। मानव गतिविधियों से बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश कम होने के साथ-साथ हंगरी की पुरानी वॉटर मैनेजमेंट पॉलिसी भी जिम्मेदार मानी जा रही है। देश ने प्राकृतिक दलदलों का पानी निकालकर खेती के लिए जमीन तैयार की थी।
हंगरी की करीब एक चौथाई जमीन ऐसी नीची भूमि है, जो स्वाभाविक रूप से बारिश का पानी रोक सकती है। पुराने समय में नदियों और धाराओं के कारण यहां पानी के बड़े भंडार थे, लेकिन 2023 के एक अध्ययन के मुताबिक, देश ने ऐतिहासिक रूप से 80 फीसदी से ज्यादा आर्द्रभूमि खो दी है। पर्यावरण समूह की विशेषज्ञ जुज़ाना उज्ज ने कहा कि पिछले 200 वर्षों में हंगरी अपने जल संसाधनों का अच्छा प्रबंधन नहीं कर पाया। यहां 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा ड्रेनेज नहरें हैं, जो खेतों और दलदलों से पानी बाहर निकालती हैं। इससे भूजल और मिट्टी सूखती गई।
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हंगरी की करीब एक चौथाई जमीन ऐसी नीची भूमि है, जो स्वाभाविक रूप से बारिश का पानी रोक सकती है। पुराने समय में नदियों और धाराओं के कारण यहां पानी के बड़े भंडार थे, लेकिन 2023 के एक अध्ययन के मुताबिक, देश ने ऐतिहासिक रूप से 80 फीसदी से ज्यादा आर्द्रभूमि खो दी है। पर्यावरण समूह की विशेषज्ञ जुज़ाना उज्ज ने कहा कि पिछले 200 वर्षों में हंगरी अपने जल संसाधनों का अच्छा प्रबंधन नहीं कर पाया। यहां 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा ड्रेनेज नहरें हैं, जो खेतों और दलदलों से पानी बाहर निकालती हैं। इससे भूजल और मिट्टी सूखती गई।
पानी की कमी का असर झील गरांक्सी पर भी दिख रहा है, जो बुडापेस्ट से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है। कभी यहां मछली पकड़ने, तैरने और बर्फ पर स्केटिंग के लिए लोग आते थे। यह झील 2001 की चर्चित हंगेरियन कॉमेडी ‘ग्लास टाइगर’ में भी दिखाई गई थी। अब इसका ज्यादातर तल फटकर सूख चुका है और सभी मनोरंजक गतिविधियां बंद हैं। बचा पानी इतना उथला और गर्म है कि मछलियां और ज्यादातर वन्यजीव गायब हो चुके हैं। झील किनारे ग्लास टाइगर बार चलाने वाले जोल्तान मेटनर ने कहा, 'इसे इस हालत में देखना बहुत दुखद है। हम इसे बचाने के लिए धीरे-धीरे कदम उठा सकते थे।'
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पानी की कमी का असर झील गरांक्सी पर भी दिख रहा है, जो बुडापेस्ट से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है। कभी यहां मछली पकड़ने, तैरने और बर्फ पर स्केटिंग के लिए लोग आते थे। यह झील 2001 की चर्चित हंगेरियन कॉमेडी ‘ग्लास टाइगर’ में भी दिखाई गई थी। अब इसका ज्यादातर तल फटकर सूख चुका है और सभी मनोरंजक गतिविधियां बंद हैं। बचा पानी इतना उथला और गर्म है कि मछलियां और ज्यादातर वन्यजीव गायब हो चुके हैं। झील किनारे ग्लास टाइगर बार चलाने वाले जोल्तान मेटनर ने कहा, 'इसे इस हालत में देखना बहुत दुखद है। हम इसे बचाने के लिए धीरे-धीरे कदम उठा सकते थे।'
सरकार अब जल प्रबंधन की दिशा बदलने की बात कर रही है। जून के अंत में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान का रिकॉर्ड बनने वाले दिन देश के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने व्यापक जल संरक्षण कार्यक्रम का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पानी की कमी हंगरी की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौतियों में है और अब 'जल संरक्षण हंगरी के जल प्रबंधन का मूल सिद्धांत होगा।' उन्होंने यह भी बताया कि पुरानी पाइपलाइन से 20-25 फीसदी पीने का पानी रास्ते में ही लीक हो जाता है, जिससे हर साल काफी नुकसान होता है। पहले समस्या को नकारा जाता रहा, अब नीति बदलने का दावा है।
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सरकार अब जल प्रबंधन की दिशा बदलने की बात कर रही है। जून के अंत में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान का रिकॉर्ड बनने वाले दिन देश के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने व्यापक जल संरक्षण कार्यक्रम का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पानी की कमी हंगरी की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौतियों में है और अब 'जल संरक्षण हंगरी के जल प्रबंधन का मूल सिद्धांत होगा।' उन्होंने यह भी बताया कि पुरानी पाइपलाइन से 20-25 फीसदी पीने का पानी रास्ते में ही लीक हो जाता है, जिससे हर साल काफी नुकसान होता है। पहले समस्या को नकारा जाता रहा, अब नीति बदलने का दावा है।
इस संकट का असर ऊर्जा उत्पादन पर भी पड़ रहा है। यूरोपीय संघ की सबसे लंबी नदी डेन्यूब इस गर्मी में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची, जिससे हंगरी के एकमात्र परमाणु बिजलीघर पाक्स पर खतरा मंडरा रहा है। नदी का पानी रिएक्टर ठंडा करने के लिए इस्तेमाल होता है और 44 साल के इतिहास में पहली बार संयंत्र बंद होने का खतरा पैदा हुआ। सरकार ने पानी बढ़ाने के लिए नदी में दो 80 मीटर लंबी नावें डुबोईं और पानी को पंपों की ओर मोड़ने के लिए नदी तल में अवरोध बनाया। विशेषज्ञ उज्ज के मुताबिक, आर्द्रभूमियां प्राकृतिक जलाशय की तरह काम कर सकती हैं।
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इस संकट का असर ऊर्जा उत्पादन पर भी पड़ रहा है। यूरोपीय संघ की सबसे लंबी नदी डेन्यूब इस गर्मी में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची, जिससे हंगरी के एकमात्र परमाणु बिजलीघर पाक्स पर खतरा मंडरा रहा है। नदी का पानी रिएक्टर ठंडा करने के लिए इस्तेमाल होता है और 44 साल के इतिहास में पहली बार संयंत्र बंद होने का खतरा पैदा हुआ। सरकार ने पानी बढ़ाने के लिए नदी में दो 80 मीटर लंबी नावें डुबोईं और पानी को पंपों की ओर मोड़ने के लिए नदी तल में अवरोध बनाया। विशेषज्ञ उज्ज के मुताबिक, आर्द्रभूमियां प्राकृतिक जलाशय की तरह काम कर सकती हैं।
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