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'बच जाना ही सबसे बड़ी सजा बन गया', AI-171 क्रैश के एकमात्र Survivor विश्वास कुमार रमेश का दर्दनाक सच

 Published : Jun 12, 2026 01:43 pm IST,  Updated : Jun 12, 2026 01:43 pm IST

AI-171 क्रैश का ‘मिरेकल मैन’ आज भी टूटा हुआ है। 260 मौतों के बीच अकेले बचे विश्वास कुमार उस मंजर को आज भी नहीं भूले हैं। वह कहते हैं कि सिर्फ ज़िंदा रहना ही पूरी कहानी नहीं है। उसके बाद मैंने जो कुछ भी झेला है, वह इतना मुश्किल था कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

vishwas kumar ramesh- India TV Hindi
विश्वास कुमार रमेश प्लेन क्रैश में जीवित बचे एकमात्र यात्री हैं। Image Source : PTI (FILE PHOTO)

दुनिया के लिए विश्वास कुमार रमेश एयर इंडिया AI-171 क्रैश के 'चमत्कारी व्यक्ति' बन गए क्योंकि वे अकेले ऐसे व्यक्ति थे जो बोइंग 787 के मलबे से जिंदा बाहर निकले, जबकि उस हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी। लेकिन हादसे के एक साल बाद, विश्वास कुमार का कहना है कि बच जाना ही उनकी मुश्किलों का अंत नहीं था। विश्वास कुमार रमेश सबसे भाग्यशाली हैं, लेकिन वह खुद इस भयावह सदमे से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

AI-171 क्रैश में बच गए, लेकिन मानसिक जख्म नहीं भर पाए

प्लेन क्रैश की पहली बरसी पर एक बयान में विश्वास कुमार ने कहा, "लोग देखते हैं कि मैं बच गया, लेकिन वे हमेशा उन चुनौतियों को नहीं देख पाते जो बंद दरवाज़ों के पीछे बनी रहती हैं। मुझे अब भी नींद न आने, एंग्जायटी और मुश्किल यादों से जूझना पड़ता है। एक साल बीतने के बाद भी, मैं अपनी ज़िंदगी को फिर से संवारने और अपने परिवार की हर संभव मदद करने की कोशिश कर रहा हूं।"

प्लेन क्रैश में भाई को खो चुके हैं विश्वास

12 जून, 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाला बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, टेक-ऑफ के सिर्फ़ 32 सेकंड बाद ही BJ मेडिकल कॉलेज कैंपस में क्रैश हो गया था। हादसे में प्लेन में सवार 242 में से 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी। भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश घायल जिंदा बच गए थे। लेकिन उनके भाई अजय, जो प्लेन में दूसरी जगह बैठे थे, नहीं बच पाए।

'सिर्फ ज़िंदा रहना ही पूरी कहानी नहीं है'

उन्होंने कहा, "मैं ज़िंदा रहने के लिए शुक्रगुज़ार हूं, लेकिन सिर्फ़ ज़िंदा रहना ही पूरी कहानी नहीं है। उसके बाद मैंने जो कुछ भी झेला है, वह इतना मुश्किल था कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।" इन बातों से 40 वर्षीय विश्वास पर पड़े भावनात्मक असर की झलक दिखती है, जो भारत के सबसे भयानक हवाई हादसों में से एक में बचने वाले एकमात्र यात्री के तौर पर अचानक सुर्खियों में आ गए थे।

'चारों तरफ लाशें देखकर डर गया था' 

हादसे के तुरंत बाद खून से लथपथ और लंगड़ाते हुए विश्वास कुमार की तस्वीरें टीवी स्क्रीन और सोशल मीडिया पर फैल गईं। कुछ घंटों बाद अस्पताल के बिस्तर से बात करते हुए, उन्होंने बताया कि कैसे मलबे और लाशों के बीच उनकी आंख खुली और फिर वे किसी तरह सुरक्षित जगह पर पहुंचे। उन्होंने बताया, "जब मैं उठा, तो मेरे चारों ओर लाशें थीं। मैं डर गया था। मैं खड़ा हुआ और भागा।"

हादसे के एक साल बाद भी नींद और यादों से जूझ रहे विश्वास

इस हादसे में उनके भाई अजय कुमार रमेश की मौत हो गई, जो भारत में परिवार से मिलने के बाद उनके साथ लंदन जा रहे थे। पिछले एक साल में कई इंटरव्यू में कुमार ने बार-बार इसका ज़िक्र किया है और इसे इस त्रासदी से मिला सबसे गहरा जख्म बताया है। दुर्घटना स्थल के दृश्य, चमत्कारिक तरीके से बचने और भाई की मृत्यु की भयावह तस्वीर अब भी उन्हें परेशान कर रही है। उन्होंने कहा, शारीरिक चोटें तो ठीक हो गईं, लेकिन भावनात्मक घावों से उबरना ज्यादा मुश्किल साबित हुआ।

भाई की मौत, अपनी बचत गंवाई और अब अकेलापन

दोस्तों और परिवार के सदस्यों ने बताया है कि कुमार को हादसे की बार-बार याद आने, नींद न आने और उस घटना के बाद ज़िंदगी में दोबारा ढलने में कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिसमें उनके आस-पास के लगभग सभी लोग मारे गए थे। इस हादसे की वजह से आर्थिक तंगी भी हुई। पहले मिली जानकारी के मुताबिक, विश्वास कुमार और उनके भाई अजय ने अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा भारत में मछली पकड़ने के कारोबार में लगाया था। हादसे और अजय की मौत के बाद परिवार की योजनाएं अधर में लटक गईं, जिससे पहले से ही बेहद मुश्किल रहे उस साल में तनाव और बढ़ गया।

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