हरियाणा में सरकारी नौकरियों में मेरिट को लेकर भाजपा के ही एक विधायक ने ऐसा बयान दिया है, जिस पर राजनीतिक बहस छिड़ सकती है। जींद के सफीदों से भाजपा विधायक रामकुमार गौतम उर्फ दादा गौतम ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार में मेरिट के आधार पर नौकरी देने की नीति को उनकी सबसे बड़ी गलती बताया है। इतना ही नहीं, विधायक ने मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को भी एंटी-इनकंबेंसी को लेकर आगाह किया है।
बीजेपी विधायक ने मेरिट के आधार पर नौकरी देने की नीति की आलोचना की
सफीदों से भाजपा विधायक दादा गौतम ने सरकारी नौकरियों में मेरिट और बेरोजगारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सबसे बड़ी गलती मेरिट के आधार पर नौकरी देना थी। दादा गौतम ने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने सरकार बनाई, अगर उन्हीं के बच्चे बेरोजगार रह जाएं तो मेरिट क्या कर लेगी? उन्होंने कहा कि जो बच्चे मेरिट में पीछे रह गए, उनकी उम्र निकल गई और वे नौकरी पाने की निर्धारित आयु सीमा से बाहर हो गए।
विधायक ने अपने ड्राइवर के परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके चार भाई हैं और चारों ओवरएज हो गए। मेरिट में पीछे रहने के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिली। उन्होंने युवाओं की शादी-ब्याह से जुड़ी परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे बच्चे कुंवारे मरेंगे।
दादा गौतम ने सीएम सैनी को भी किया आगाह
दादा गौतम ने कहा कि हर राजा का धर्म है कि वह सभी को उनका हक दे। उन्होंने सवाल किया कि आखिर मेरिट क्या है? साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसे लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो एंटी-इनकंबेंसी दूर करना मुश्किल हो सकता है।
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भाजपा विधायक दादा गौतम का यह बयान अब चर्चा का विषय बन सकता है। एक तरफ सरकारी भर्तियों में मेरिट और पारदर्शिता को अहम माना जाता है, तो दूसरी तरफ बेरोजगार युवाओं और ओवरएज हो चुके अभ्यर्थियों की समस्याएं भी बड़ा मुद्दा हैं। अब देखना होगा कि दादा गौतम के इस बयान पर भाजपा संगठन और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
रिपोर्ट : राजकुमार गोयल, जींद
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