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क्या PCOS की समस्या ठीक हो सकती है, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए?

 Written By: Vanshika Saxena
 Published : Sep 04, 2025 07:23 am IST,  Updated : Sep 04, 2025 07:23 am IST

PCOS Awareness Month: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम अवेयरनेस का महीना चल रहा है। आइए जानते हैं कि सेहत से जुड़ी इस समस्या को कैसे दूर किया जा सकता है...

पीसीओएस- India TV Hindi
पीसीओएस Image Source : FREEPIK

क्या पीसीओएस ठीक हो सकता है? इस सवाल के जवाब में क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, हेल्थ कोच और TEDx स्पीकर डॉ. निधि निगम ने बताया कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का कोई परमनेंट मेडिकल क्योर नहीं है। लेकिन सही लाइफस्टाइल से पीसीओएस को रिवर्स या फिर मैनेज किया जा सकता है। अगर बॉडी के हॉर्मोन को संतुलित कर इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार किया जाए तो न केवल पीसीओएस की समस्या मैनेज हो पाएगी बल्कि ओवरऑल हेल्थ पर भी पॉजिटिव असर पड़ेगा।

जरूरी है पोषण

पीसीओएस को मैनेज करने के लिए संतुलित आहार पहला कदम है। ब्लड शुगर में सुधार के लिए हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थ जैसे सब्जियां, फल और साबुत अनाज का सेवन किया जा सकता है। डॉ. निधि निगम ने बताया कि हॉर्मोन को नियंत्रित करने के लिए लीन प्रोटीन युक्त फूड्स जैसे अंडे, मछली, दाल और पनीर को कंज्यूम किया जा सकता है। इसके अलावा सूजन कम करने के लिए हेल्दी फैट्स वाले मेवे, बीज और जैतून के तेल का सेवन किया जा सकता है।

रोज करें एक्सरसाइज

नियमित शारीरिक गतिविधि इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करती है। आपको हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए फिर चाहे वॉक करें, साइकिल चलाएं या फिर स्विमिंग करें। मसल बिल्डिंग और फैट को प्रभावी ढंग से जलाने के लिए एक हफ्ते में 2-3 बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करनी चाहिए। पीसीओएस को मैनेज करने के लिए तनाव को भी प्रबंधित करने की कोशिश करनी चाहिए। दरअसल, तनाव कोर्टिसोल बढ़ाता है, जिससे हॉर्मोन्स में गड़बड़ी होती है। इसलिए रोजाना योग, मेडिटेशन, जर्नलिंग या डीप ब्रीदिंग करें। रोजाना 7-8 घंटे की नींद भी पीसीओएस मैनेजमेंट के लिए जरूरी है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस का प्रबंधन

डॉ. निधि निगम ने बताया कि इंसुलिन प्रतिरोध पीसीओएस का मूल है। इसे मैनेज करने के लिए रेगुलर इंटरवल पर संतुलित भोजन करें। हो सकता है कि जरूरत पड़ने पर आपका डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ इंसुलिन-संवेदनशील दवाएं भी लिखे। पीसीओएस हेल्थ या फर्टिलिटी का अंत नहीं है। पोषण, व्यायाम, तनाव नियंत्रण और बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता के साथ, ज्यादातर महिलाएं पीसीओएस के लक्षणों को दूर कर सकती हैं, हॉर्मोनल संतुलन वापस पा सकती हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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