मुंबई: मराठवाड़ा में तालाब, नहरें, खेत-खलिहान सब सूखे पड़े हैं। दूर-दूर तक पानी का नामो-निशान नहीं है। कल लातूर में आज परभणी में पानी पर धारा 144 लगा दी गई। सिर्फ इसलिए कि कोई पानी को लूट ना ले, कहीं पानी के लिए हिंसा न हो जाए। इस बीच सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र में पानी की बर्बादी को लेकर बीसीसीआई और महाराष्ट्र तथा मुंबई क्रिकेट संघ को आड़े हाथों लेते हुए बंबई हाईकोर्ट ने आज कहा कि आईपीएल के मैच ऐसी जगह कराने चाहिए जहां जलसंकट नहीं हो। अदालत ने कहा, जब बीसीसीआई को पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाये, तभी आपको समझ में आएगा।
मराठवाड़ा में पानी पर धारा-144 क्यों ?
परभणी जिले में पानी से भरे टैंकर की हाथ में डंडे लेकर पुलिसवाले निगरानी करते है। पुलिसवालों को सख्त निर्देश मिले हैं कि टैंकर के पास कोई अनजान आदमी ने आने पाए। परभणी में 4 अप्रैल से 3 मई तक धारा 144 लगी रहेगी। शहर के जिन प्वाइंट पर टैंकर में पानी भरा जाता है वहां 5 लोग इकट्ठा नहीं हो सकते। खुद जिले के कलेक्टर हालात की निगरानी कर रहे हैं और पुलिसवालों को सख्त निर्देश मिले हैं कि ड्यूटी में जरा भी कोताही न बरती जाए।
महाराष्ट्र के 16 जिले सूखे की चपेट में
महाराष्ट्र के कुल 16 जिले सूखे से प्रभावित हैं। हालात इतने खराब हैं कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट तक को टिप्पणी करनी पड़ गई। महाराष्ट्र में 8 अप्रैल से आईपीएल की शुरुआत होने जा रही है। हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और क्रिकेट एसोसिएशन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा, ‘जब राज्य सूखे की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे हालात में आईपीएल के लिए पानी का इस्तेमाल अपराध की तरह है’ हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि राज्य में आईपीएल ज्यादा जरूरी है या फिर आम लोग। कल कोर्ट में इस केस की सुनवाई होनी है।
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