नई दिल्ली: हिंदुस्तान में बजट का इतिहास काफी पुराना है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि 15 अगस्त 1947 से पहले देश में बजट पेश नहीं हुआ। आपको बता दें कि ज्ञात इतिहास में भारत में पहली बार बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था और इसे एक अंग्रेज व्यक्ति जेम्स विल्सन ने पेश किया था। यह दीगर बात है कि संविधान के अनुरुप बजट की शुरुआत भारत की आजादी के बाद शुरु हुई। हम अपनी बजट सीरीज की इस खेंप में बजट से जुड़े इतिहास की Timeline आपसे साझा करेंगे।
- आजाद भारत का पहला बजट तात्कालीन वित्त मंत्री आर के षणमुखम शेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था।
- जॉन मथाई देश के दूसरे वित्त मंत्री थे जिन्होंने 1949-50 का बजट पेश किया। यह ऐतिहासिक बजट था और महंगाई पर केंद्रित था। इसी बजट के जरिए देश ने योजना आयोग और पंचवर्षीय योजनाओं जैसे शब्दों को चुना।
- साल 1955 के बाद यानी 1955-56 के बजट से ही बजट से जुड़े दस्तावेज हिंदी में भी तैयार किए जाने लगे।
- 1955-56 के केंद्रीय बजट में कालाधन उजागर करने की योजना शुरु की गई।
- साल 1994 के केंद्रीय बजट में सेवा कर का प्रावधान किया गया। इस बजट को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेश किया था।
- जवाहर लाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने देश का बजट पेश किया। उन्होंने साल 1958-59 में बजट पेश किया, तब वो देश के वित्त मंत्री भी थे।
- साल 1973-74 के बजट को भारत के ब्लैक बजट के रूप में जाना जाता है। इस साल देश का बजट घाटा 550 करोड़ था।
- मोरारजी देसाई देश के एकलौते वित्त मंत्री थे जिन्होंने दो बार अपने जन्मदिन पर ही बजट पेश किया।
- इंदिरा गांधी ने साल 1970 से 1971 तक वित्त मंत्रालय संभाला और उन्होंने इसी दौरान बजट भी पेश किया।
- आर वेंकटरमण देश के एकलौते ऐसे वित्तमंत्री रहे जिन्होंने बाद में राष्ट्रपति (1987-92) पद की भी शोभा बढ़ाई।
- राजीव गांधी ने साल 1987 के बजट में भारत का पहली बार कारपोरेट टैक्स से परिचय करवाया।
- बजट के इतिहास में ऐसा मौका भी आया जब साल 1991-92 का अंतरिम और फिनेंसियल बजट दो अलग-अलग पार्टियों के अलग अलग मंत्रियों ने पेश किया। यशवंत सिन्हा ने अंतरिम बजट पेश किया जबकि मनमोहन सिंह ने फाइनल बजट पेश किया।
- मनमोहन सिंह ने साल 1994 के अपने बजट में सर्विट टैक्स के टर्म को भारत के सामने रखा।
- यशवंत सिन्हा को साल 2002 के केंद्रीय बजट में सबसे ज्यादा रोलबैक शामिल करने के लिए जाना जाता है।
- यशवंत सिन्हा ने साल 1991 में विदेशी मुद्रा संकट के दौर में बजट पेश किया। साल 1999 में उन्होंने जब बजट पेश किया तब देश में पोखरण विस्फोट पर चर्चा आम थी। साल 2000 में जब उन्होंने बजट पेश किया तब देश कारगिल की लड़ाई के बाद के माहौल से जूझ रहा था, जबकि साल 2001 में जब उन्होंने बजट पेश किया तब देश गुजरात में आए भूकंप की चिंता में डूबा हुआ था।