नई दिल्ली: फिनमेकैनिका और अगस्तावेस्टलैंड के तत्कालीन प्रमुखों को सजा देने के इटली की अदालत के फैसले से 3600 करोड़ रुपए के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में कथित तौर पर रिश्वत मामले को लेकर सीबीआई जांच की सोच बदल गई। सूत्रों ने कहा कि मिलान कोर्ट ऑफ अपील्स के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि सौदे में कथित तौर पर रिश्वत दी गई। यह सौदा ब्रिटेन की अगस्तावेस्टलैंड के हाथ लगा। यह कंपनी इटली की फिनमेकैनिका की सहयोगी कंपनी है।
जांच से परिचित एक अधिकारी ने कहा, इटली की अदालत के फैसले ने सीबीआई का विचार बदल दिया है। जांच हो रही थी कि लाभार्थी कौन हैं और जहां तक घरेलू बिंदु की बात है तो उसमें हम एक ठोस स्तर तक पहुंच गए हैं। जो बचा हुआ है वह है धन के हस्तांतरण की श्रृंखला जिसके लिए अनुरोध पत्र की प्रतीक्षा की जा रही है। उनसे जांच पर इटली के अदालत के फैसले के बारे में पूछा गया था जिसकी जांच एजेंसी कर रही है। उनका जवाब इस प्रश्न पर आया कि सोच का क्या मतलब है।
एजेंसी को अनुरोध पत्र का जवाब मिल गया है जो एक अदालत से दूसरी अदालत का न्यायिक आग्रह है जिसमें दूसरे देश इटली से जांच में सहयोग मांगा गया जबकि ट्यूनिशिया, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड और ब्रिटेन से आंशिक जवाब मिला है। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात, स्विट्जरलैंड और मॉरिशस से जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है। फिनमेकैनिका के पूर्व प्रमुख गुइसेपे ओरसी और अगस्तावेस्टलैंड के पूर्व सीईओ ब्रूनो स्पैगनोलिनी को मिलान कोर्ट ऑफ अपील्स ने दोषी पाया। यह अदालत भारत में उच्च न्यायालय के समकक्ष है।
सूत्रों ने कहा कि जब तक वे इटली से लेकर भारत तक धन स्थानांतरण श्रृंखला की जांच पूरी नहीं कर लेते वे पहेली को नहीं सुलझा सकते और आरोपपत्र दायर नहीं कर सकते। एजेंसी ने मामले में भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एस पी त्यागी और उनके तीन रिश्तेदारों तथा पांच विदेशी नागरिकों सहित 12 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। त्यागी ने आरोपों से इंकार किया है। इसके अलावा इटली की फिनमेकैनिका, अगस्तावेस्टलैंड, मोहाली की आईडीएस इन्फोटेक, चंडीगढ़ की एयरोमैट्रिक्स, आईडीएस ट्यूनिशिया और आईडीएस मॉरिशस के खिलाफ भी सीबीआई ने मामला दर्ज किया है।