नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में यह जानकारी दी कि चीन को यह बता दिया गया है कि आतंकवादियों के बीच फर्क करने का रवैया नहीं चलेगा और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। विदेश राज्य मंत्री वी.के.सिंह ने संसद के निम्न सदन में प्रश्नकाल के दौरान कहा, "चीन से कहा गया है कि आतंकवादियों के बीच आप फर्क नहीं कर सकते।"
विपक्ष ने पूछा, कूटनीतिक हथियार क्यों हुए कमज़ोर
पूरक प्रश्न के तहत कांग्रेस के सदस्य गौरव गोगोई ने कहा कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के भारत के प्रयासों को जो झटका लगा है, वह नई दिल्ली की कूटनीतिक हार है। साथ ही उन्होंने यह बात जानना चाहा कि भारत के कूटनीतिक हथियार आखिर क्यों और कैसे कमजोर होते जा रहे हैं।
विदेश राज्य मंत्री ने कहा, चीन की अड़चनों को हटाने की कोशिश जारी है
विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि चीन द्वारा अटकाए गए तकनीकी रोड़े को हटाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। भारत ने इस साल फरवरी में सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत मसूद अजहर को प्रतिबंधित आतंकवादियों की सूची में शामिल करने की सिफारिश की थी। चीन ने इस प्रस्ताव पर अड़ंगा लगाते हुए इस पर तकनीकी रोड़ा अटका दिया, जबकि अन्य सदस्यों -अमेरिका, ब्रिटेन तथा फ्रांस- ने भारत के प्रस्ताव का समर्थन किया था।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट पाने की कोशिश कर रहा है भारत
भाजपा तथा बीजू जनता दल (बीजद) के सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि भारत खुद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक स्थायी सीट पाने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन इसमें लंबा वक्त लगेगा। उन्होंने कहा, "वर्ष 1992 से ही प्रयास जारी हैं और 2008 में इसका पहला दौर नाकाम हो चुका है। साल 2008 के बाद दूसरा दौर जारी है। हम सभी मित्रवत देशों के साथ संपर्क में हैं और कई बड़े देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार का पक्ष लिया है।" चीन भी समय-समय पर कहता आया है कि संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका के लिए वह भारत का समर्थन करता है।