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राजस्थान में अपराधी बेखौफ, शुक्रवार को हुई इन दो घटनाओं ने उठाए पुलिस व्यवस्था पर सवाल

 Reported By: Bhasha
 Published : Sep 07, 2019 06:59 pm IST,  Updated : Sep 07, 2019 06:59 pm IST

राजस्थान का नाम सुनते ही हमारे दिलो-दिमाग नें रेतीले धौरों की तस्वीर उभरने लगती है, लेकिन आजकल राजस्थान से कुछ और की खबरों की वजह से सुर्खियों में है। दरअसल पिछले कुछ समय से जिस तरह से राजस्थान से लगातार आपराधिक घटनाओं की खबरें आ रही हैं, वो काफी चौंकाने वाली हैं।

Crime- India TV Hindi
प्रतिकात्मक तस्वीर Image Source : INDIA TV

जयपुरराजस्थान का नाम सुनते ही हमारे दिलो-दिमाग नें रेतीले धौरों की तस्वीर उभरने लगती है, लेकिन आजकल राजस्थान से कुछ और की खबरों की वजह से सुर्खियों में है। दरअसल पिछले कुछ समय से जिस तरह से राजस्थान से लगातार आपराधिक घटनाओं की खबरें आ रही हैं, वो काफी चौंकाने वाली हैं।

दरअसल शुक्रवार को राजस्थान से दो ऐसे घटनाओं की खबरें आईं, जिसने सोचने को मजबूर कर दिया। पहली घटना राजस्थान के बहरोड की है, जहां सुबह 10 बजे हथियारों से लैस बदमाश स्कार्पियों में सवार होकर बहरोड थाने में घुसते हैं और एके-47 से फिल्मी अंदाज में एके-47 से फायर करना शुरू कर देते हैं। इससे पहले की कोई कुछ समझ पाए ये बदमाश अपने साथी  व कुख्यात बदमाश विक्रम गुर्जर उर्फ पपला गुर्जर (28) को लेकर लेकर फरार हो जाते हैं।

जिस वक्त बदमाश इस घटना को अंजाम दे रहे थे, उस समय कुछ पुलिसकर्मी उनका सामना करने के बजाय पीछे के दरवाजे से भाग निकलते हैं, थानेदार साबह पिस्टल से एक फायर तो करत हैं, लेकिन उनकी पिस्टल ही जाम हो जाती है।

दूसरी घटना है जयपुर की, जहां देर रात शहर का विश्वकर्मा इलाका गोलियो की तड़तड़ाहट से गूंज उठता है। यहां बीएमडब्लयू मे सवार होकर बदमाश पहले तो अपने परिचत की गाड़ी लूटते हैं और उसको गोली मार देते हैं, बदमाश इतने पर ही नहीं रुकते हैं, महज 10 किमी की दूरी पर वो फिर एक कार लूटते हैं और फायर करते हुये फरार हो जाते हैं और इस दौरान पांच थानों की पुलिस खाली हाथ रह जाती है।

ये दो ही मामले राजस्थान मे गहलोत सरकार की कानून व्यवस्था की असल तस्वीर दिखाने के लिए काफी हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से खाकी वर्दी पर राजनीति का रंग कुछ ऐसा चढने लगा है कि वर्दी की हनक और खनक दोनों कमजोर दिखाई दे रही हैं शायद यही वजह है गुंडों का वर्चस्व सर चढ़ कर बोलने लगा है। आप जान कर हैरान होंगे कि सूबे के मुखिया ने दो दिन पुलिस अधिकारियों से भरसक सवाल जवाब किए, लेकिन बैठकों में लिए गए फैसलों और कागजों पर चलने वाली कलम में हकीकत के घरातल पर दम तोड़ दिया।

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