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कल सियाचिन दौरे पर जाएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सेना प्रमुख बिपिन रावत भी होंगे साथ

Written by: IndiaTV Hindi Desk Published : Jun 02, 2019 02:20 pm IST, Updated : Jun 02, 2019 02:20 pm IST

देश के नए रक्षा मंत्री पदभार संभालते ही एक्शन में आ गए हैं। रक्षा मंत्री बनने के बाद राजनाथ सिंह कल सियाचिन के पहले दौरे पर जाएंगे।

Defence Minister Rajnath singh visit to Siachen on Monday- India TV Hindi
Image Source : PTI Defence Minister Rajnath singh visit to Siachen on Monday

नई दिल्ली: देश के नए रक्षा मंत्री पदभार संभालते ही एक्शन में आ गए हैं। रक्षा मंत्री बनने के बाद राजनाथ सिंह कल सियाचिन के पहले दौरे पर जाएंगे। इस दौरे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ आर्मी चीफ बिपिन रावत और नॉर्दन आर्मी कमांडर भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि सियाचिन दौरे से देश के नए रक्षा मंत्री ना केवल जवानों का हौसला बढ़ाएंगे बल्कि चीन को भी सीधा संदेश देने की कोशिश करेंगे।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल वाली सरकार में सिंह गृह मंत्री थे लेकिन इस बार उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया है। रक्षा मंत्री के तौर पर सिंह की सबसे अहम चुनौती सेना के तीनों अंगों के काफी समय से लंबित पड़े आधुनिकीकरण को तेज करने और उनकी युद्ध तैयारियों में संपूर्ण सामंजस्य सुनिश्चित करने की होगी। उनके समक्ष एक और चुनौती चीन से लगी सीमा पर शांति एवं स्थिरता कायम करने तथा वहां चीन की किसी संभावित शत्रुता से निपटने के लिए जरूरी सैन्य बुनियादी ढांचा विकसित करने की होगी।

पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर भारत के एयर स्ट्राइक करने के महज तीन महीने बाद रक्षा मंत्रालय की उन्हें जिम्मेदारी मिलने पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह सीमा पार से आतंकवाद से निपटने की दृढ़ संकल्प वाली नीति को जारी रखेंगे। पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर में घुसपैठ पर रोक लगाना एक और अहम क्षेत्र होगा।

बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और भू-राजनीतिक परिदृश्य के चलते बतौर रक्षा मंत्री सिंह को थल सेना, नौसेना और वायुसेना की युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने की चुनौती का सामना करना होगा। सशस्त्र बल ‘‘हाईब्रिड वारफेयर’’ से निपटने के लिए खुद को साजो सामान से सुसज्जित करने पर जोर दे रहे हैं और सिंह को यह अहम मांग पूरी करनी होगी।

उल्लेखनीय है कि ‘‘हाईब्रिड वारफेयर’’ एक ऐसी रणनीति है, जिसमें परंपरागत सैन्य बल को तैनात किया जाता है और इसे साइबर युद्ध तरकीबों से सहयोग प्रदान किया जाता है। सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रही है और सिंह को महत्वाकांक्षी रणनीतिक साझेदारी मॉडल के क्रियान्वयन सहित कई बड़े सुधारों की पहल करनी होगी। नए मॉडल के तहत चयनित भारतीय निजी कंपनियों को विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ भारत में पनडुब्बी और लड़ाकू विमान जैसे साजो सामान बनाने के काम में लगाया जाएगा।

रक्षा बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों का देश में उत्पादन कर सकने के लिए रक्षा अनुसंधान संगठनों और रक्षा क्षेत्र के अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के आधुनिकीकरण की भी उनके समक्ष चुनौती होगी। सिंह को सेना में बड़े सुधारों के क्रियान्वयन की निगरानी भी करनी पड़ेगी। सेना ने इस सिलसिले में एक खाका को भी अंतिम रूप दिया है। उनकी पूर्वाधिकारी निर्मला सीतारमण को राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर विपक्ष के आरोपों का सामना करना पड़ा था और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सिंह इस मुद्दे से कैसे निपटते हैं। 

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