नई दिल्ली: प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JEM) के प्रति कथित तौर पर वैचारिक रझान रखने के आरोप में दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए 10 संदिग्ध आतंकवादियों में से 4 को शनिवाक को पर्याप्त सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने रिहा करने से पहले उनसे तीन दिन तक पूछताछ की।
दिल्ली पुलिस ने जांच में मदद के लिए साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने वाली भारत सरकार की नोडल एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रेसपान्स टीम (सीईआरटी-इन) से भी संपर्क किया है।
चार संदिग्धों जिन्हें रिहा किया गया, उसमें से तीन पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके के रहने वाले हैं और एक गाजियाबाद के लोनी इलाके का है। उन्हें बल की आतंकवाद रोधी इकाई के विशेष प्रकोष्ठ के लोदी कालोनी स्थित कार्यालय से शाम चार बजे के करीब छोड़ दिया गया।
विशेष प्रकोष्ठ के विशेष पुलिस आयुक्त अरविंद दीप ने बताया, हमने दिल्ली के रहने वाले एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट की व्यवस्था की है और चारों से उनके पास नियमित जाने को कहा है। मनोचिकित्सक हर सप्ताह उनके प्रगति के बारे में हमें रिपोर्ट प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि युवाओं के अंदर काफी गुस्सा था जिसकी वजह से वे आतंकवादी संगठन में शामिल किए जाने के प्रति संवेदनशील थे। चारों युवकों को जांच अधिकारियों ने तब छोड़ दिया जब उन्हें संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद रिंग में उनकी संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिला। इस रिंग का तीन युवकों की गिरफ्तारी और उनके कब्जे से आईईडी बरामद किए जाने के साथ इस सप्ताह की शुरूआत में भंडाफोड़ किया गया था।
मंगलवार को देर रात के अभियान के बाद विशेष प्रकोष्ठ ने 13 लोगों को पकड़ा था। उनमें से तीन साजिद, समीर अहमद और शाकिर अंसारी को गिरफ्तार किया गया है, चार को छोड़ दिया गया और छह लोगों से जांच अधिकारी अब भी पूछताछ कर रहे हैं।