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व्हीलचेयर पर बैठा किसान भी आंदोलन में शामिल, मां के चोट लगने पर भी नहीं गया घर

 Written By: Bhasha
 Published : Jan 09, 2021 08:37 pm IST,  Updated : Jan 09, 2021 08:37 pm IST

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाले प्रदर्शनकारी किसानों में ‘व्हीलचेयर’ पर बैठे पंजाब के जालंधर निवासी 44 वर्षीय हरविंदर सिंह भी शामिल हैं।

व्हीलचेयर पर बैठा किसान भी आंदोलन में शामिल, मां के चोट लगने पर भी नहीं गया घर- India TV Hindi
व्हीलचेयर पर बैठा किसान भी आंदोलन में शामिल, मां के चोट लगने पर भी नहीं गया घर Image Source : PTI

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर डेरा डाले प्रदर्शनकारी किसानों में ‘व्हीलचेयर’ पर बैठे पंजाब के जालंधर निवासी 44 वर्षीय हरविंदर सिंह भी शामिल हैं। सिंह पोलियो के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं और इसलिए वह व्हीलचेयर के सहारे हैं। लेकिन, उनकी यह शारीरिक अशक्तता इस आंदोलन में शामिल होने से उन्हें नहीं रोक सकी और अपनी बीमार मां को गांव में छोड़ कर प्रदर्शन में शामिल हो गये।

वह एक महीने से अधिक समय से इस प्रदर्शन स्थल पर डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पोलियो से उबरने की सारी उम्मीदें छोड़ सकता हूं लेकिन मैंने इस आंदोलन के सकारत्मक परिणाम आने की उम्मीद नहीं छोड़ी है।’’ यह पूछे जाने पर कि किस चीज ने उन्हें इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, सिंह ने कहा, ‘‘मैं एक किसान हूं और इसलिए यहां मौजूद होना मेरी जिम्मेदारी है।’’ 

आंदोलन में शामिल होने के बाद से वह सिर्फ दो बार घर गये थे। एक बार वह अपनी बीमार मां से मिलने गये थे और दूसरी बार तब गये थे जब सिंघु बॉर्डर पर ठहरने के लिए उन्हें कुछ आवश्यक चीजें लाने की जरूरत थी। सिंह के सिंघु पहुंचने के 15 दिन बाद ही उनकी 85 वर्षीय बीमार मां अमर कौर की नाक में गंभीर चोट लगी थी लेकिन इसके बावजूद उनकी मां ने सिंह को सिंघु में ही रहने और प्रदर्शन जारी रखने को कहा था। 

सिंह ने कहा, ‘‘बाद में मैं अपनी मां से मिलने गांव गया था। तब उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं अपनी लड़ाई जारी रखूं।’’ सिंह के साथ यहां मौजूद उनके भतीजे सुखविंदर ने कहा, ‘‘जब सिंह की मां को चोट लगी थी तब उन्होंने हमें इस बारे में सूचना नहीं दी और कहा कि वह ठीक हैं तथा हमें फौरन घर लौटने की जरूरत नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि वे लोग अपनी लड़ाई जारी रखें। ’’

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