
हुर्रियत के इशारे पर भीड़ भड़काने वाले चेहरे
कश्मीर में हिंसा की आग बुझती क्यों नहीं इसकी बड़ी वजह ये तस्वीरें हैं जो आए दिन कश्मीर घाटी के अलग अलग इलाकों से सामने आ रही हैं। कहीं पेट्रोल बम फेंके गए, सीआरपीएफ को टारगेट करके हमला किया तो कहीं नकाबपोश हमलावरों ने जवानों पर पत्थरों की बौछार कर दी। श्रीनगर के राजौरी कदल इलाके में हिंसा की ये सबसे नई तस्वीर है। यहां एक घंटे तक पत्थरबाजी होती रही और आगजनी की गई। जवान सड़कों पर खड़े थे और चौकन्ने थे। इसी बीच सामने से एक और पेट्रोल बम उनकी तरफ आया और एक जवान बाल बाल बच गया।
प्रदर्शनों का है खास पैटर्न
असल में इन प्रदर्शनों में एक खास पैटर्न है जो लोग एक जगह पत्थर फेंकते दिखाई देते हैं, वहीं लोग अगले दिन दूसरी जगह दिखते हैं। सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट रवि शर्मा ने बताया कि स्टोन पेल्टर्स को आइडेंटिफाई करने का काम तेज हो चुका है और कुछ लोगों की शिनाख्त हो चुकी है। उनका वीडियो एनालिसिस हो रहा है वो क्रोनिक स्टोन पेल्टर्स हैं यानी उनका काम ही पत्थरबाजी है। सीआरपीएफ का कहना है ऐसे लोगों को जल्द अरेस्ट किया जाएगा।
पत्थर मारने के एवज में मिलते है पैसे
सीआरपीएफ के कमांडेंट राजेश यादव ने बताया कि पत्थरबाज, बच्चों को आगे करके सिक्योरिटी फोर्सेस के काफी करीब आ जाते हैं और फिर उन्हें टारगेट करते हुए पत्थर फेंकते हैं। लेकिन जवानों की मजबूरी है कि ऐसी सिचुएशन में वो रिटैलियेट नहीं कर सकते। सीआरपीएफ ने बताया कि हुर्रियत के लोकल नोता हर मोहल्ले में सक्रिय हैं। वो युवकों को भड़काते हैं और उन्हें पत्थर मारने के एवज में पैसे देते हैं।
बंद की वजह से कश्मीर को अब तक 6400 करोड़ का नुकसान
अलगाववादियों की बंद की कॉल के कारण कश्मीर वैली को हर दिन 135 करोड़ का नुकसान हो रहा है। पिछले 49 दिनों में जब से हालात बिगड़े हैं तब से अब तक कश्मीर की इकॉनोमी को 6 हजार 400 करोड़ का नुकसान हो चुका है। Kashmir Traders and Manufacturers Federation (KTMF) ने ये आंकडा जारी किया है। राज्य सरकार को भी 300 करोड़ का नुकसान हुआ। कश्मीर में ये टूरिज्म का सीजन है लेकिन दुकानें, बाजार बंद हैं। डल लेक में शिकारे खाली हैं, हाउस बोट्स खाली हैं, होटल्स खाली पड़े हैं और सड़कें सुनसान हैं क्योंकि अब कोई टूरिस्ट कश्मीर का रूख नहीं कर रहा है।