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Video: #KPExodusDay: कितनी डरावनी थी 19 जनवरी की वो रात: जानिए अनुपम खेर की ज़बानी

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 19, 2016 06:20 pm IST,  Updated : Jan 20, 2016 12:01 am IST

नई दिल्ली: कश्मीरी पंडितों ने आज कश्मीरी पंडित होलोकॉस्ट/एक्ज़ोडस डे की 27 वीं वर्षगांठ पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके अपना विरोध दर्ज कराया। सम्मानजनक तरीके से कश्मीर में घर वापसी की उम्मीदें दिल

Anupam Kher has become a dominant voice of Kashmiri Pandits- India TV Hindi
Anupam Kher has become a dominant voice of Kashmiri Pandits

नई दिल्ली: कश्मीरी पंडितों ने आज कश्मीरी पंडित होलोकॉस्ट/एक्ज़ोडस डे की 27 वीं वर्षगांठ पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करके अपना विरोध दर्ज कराया। सम्मानजनक तरीके से कश्मीर में घर वापसी की उम्मीदें दिल में रखने वाले विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने यह निश्चय किया है कि वे अपनी मातृभूमि के लिए संघर्ष को जीवित रखने के लिए साल को दो दिन विवाह या कोई पारिवारिक समारोह आयोजित नहीं करेंगे। हर साल जनवरी 19 और सितंबर 14 को ‘नो सेलिब्रेशन डे’ रहेंगे। कश्मीरी पंडित सितंबर 14 को पहले से ही शहीदी दिवस मानते हैं, क्योंकि 1989 में इसी दिन अलगाववादियों ने घाटी में कश्मीरी पंडितों की चुन-चुनकर हत्या की थी।

उमर ने कहा, कश्मीरी पंडितों की वापसी के काम में नहीं हुई कोई प्रगति

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज आरोप लगाया कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए केंद्र कोई ज्यादा प्रयास नहीं कर रहा है। उमर ने घाटी से कश्मीरी पंडितों के बाहर जाने के 26 वर्ष पूरे होने पर ट्विटर पर लिखा, वर्तमान सरकार से अधिक की उम्मीद थी, जबकि अन्य सभी पर दिखावटी हमदर्दी जताने का आरोप था लेकिन कुछ भी नहीं बदला। उन्होंने कहा कि एक और साल गुजर गया है तथा विस्थापित कश्मीर पंडितों को वापस लाने में कोई प्रगति नहीं हुई है तथा शब्द निरे खोखले साबित हुए हैं।

उमर ने कहा, वे जानते हैं दोबारा घर न देख पाने का डर

उमर ने कहा, हम सभी जो कर सकते हैं वह स्वयं की प्रतिबद्धता को दोहराना है जो हम कश्मीरियत की भावना को जिन्दा रखने के लिए कर सकते हैं, इस उम्मीद में कि कश्मीर जल्द ही पूर्ण होगा। नेशनल कान्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि वह अपना घर दोबारा न देख पाने के डर को जानते हैं, क्योंकि उनके परिवार ने भी ऐसी ही परिस्थितियों में घर छोड़ा था। उन्होंने कहा, मेरे परिवार ने कुछ इसी तरह की परिस्थितियों में घर छोड़ा था, इसलिए मैं घर दोबारा न देख पाने के डर को जानता हूं, हालांकि मेरे मामले में यह कम समय के लिए रहा।

कश्मीरी पंडितों के निर्वासन का दर्द बयां करती किताब

जम्मू कश्मीर को 26 साल पहले छोड़ने के लिए मजबूर हुए कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचारों की दिल को छू लेने वाली दास्तान, उनके संघर्ष और दुर्दशा की मार्मिक कहानियों को एक किताब की शक्ल दी गई है। घर वापसी की बाट जोह रहे ये लोग अब भी अपने पूर्व के मुस्लिम पड़ोसियों के साथ सह-अस्तित्व से रहने की चाह रखते हैं।​

Bus ticket bought by Kashmiri Pandit family, when forced by separatists to go
Bus ticket bought by Kashmiri Pandit family, when forced by separatists to go

फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों से कहा – घर वापस आइए

ए लॉन्ग ड्रीम ऑफ होम: द परसेक्युशन, एक्ज़ोडस एंड एक्जाइल ऑफ कश्मीरी पंडित्स अपना राज्य छोड़ चुकी कई पीढ़ियों यों की अनकही-अनसुनी कहानियों का संग्रह है। बीती शाम को दिल्ली में इस किताब का विमोचन हुआ। किताब के विमोचन के मौके पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा, आखिरी बंदूक के शांत होने का इंतजार मत कीजिए। घर वापस आइए।

पिछले 26 साल के दौरान घर से उजड़े कश्मीरी पंडितों के लिए कुछ नहीं बदला

ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित किताब का संपादन करने वाले सिद्धार्थ गिगू के साथ रहे वरद शर्मा ने कहा, कश्मीरी पंडितों को 1990 में अपना घर-बार छोड़ने और निर्वासन का जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ा था और तब से अबतक 26 साल बाद भी केंद्र तथा राज्य की कई सरकारें बदलने के बावजूद वही पुरानी बातें दोहराई जा रही हैं। गीगू ने कहा, बीते समय में घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए बस्तियां बसाने के प्रस्ताव सहित कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन यह घर नहीं बल्कि नजरबंदी से अधिक और कुछ नहीं होगा।

कितनी डरावनी थी 19 जनवरी की वो रात: जानिए अनुपम खेर की ज़बानी:

 

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