नई दिल्ली: निर्भया' गैंगरेप पीड़ित की मां ने कहा कि उनकी बेटी का नाम ज्योति सिंह है और मुझे उसका नाम उजागर करने में जरा भी शर्मिंदगी नहीं है। तीन साल पहले 16 दिसंबर की रात को 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ जघन्य तरीके से गैंगरेप किया गया था और 13 दिन बाद लड़की की मृत्यु हो गई थी। इस घटना से पूरे देश में आक्रोश की लहर फैल गई थी। देश की जनता ने उसे ‘निर्भया’ नाम देकर श्रद्धांजलि दी। इस घटना के तीन साल पूरे होने पर पीड़िता की मां आशा देवी ने अत्यंत साहस दिखाते हुए अपनी बेटी का नाम सार्वजनिक रूप से लिया। घटना की बरसी मनाने के लिए जंतर मंतर पर महिलाओं और नागरिकों के संगठनों द्वारा आयोजित सार्वजनिक समारोह ‘निर्भया चेतना दिवस’ के मौके पर पीड़िता की मां ने कहा कि मेरी बेटी का नाम ज्योति सिंह था और मुझे उसका नाम लेने में कोई शर्म नहीं लगती। बलात्कार जैसे घिनौने अपराध करने वालों को अपने सिर शर्म से झुकाने चाहिए, न कि पीड़िताओं या उनके परिवारों को। आपको भी उसका नाम लेना चाहिए।
लड़की की मां आशा के साथ पिता बद्री सिंह पांडेय ने घटना को अंजाम देने वाले छह अपराधियों में से कथित रूप से सबसे नृशंस तरीके से अपराध को अंजाम देने वाले किशोर दोषी को रिहा नहीं किए जाने की मांग की और कहा कि वह शहर के लिए खतरा है। किशोर अपराधी को 20 दिसंबर को रिहा किया जाना है। आशा ने कहा कि हमारी बेटी की तीसरी पुण्यतिथि पर हम देख रहे हैं कि किशोर दोषी को छोड़ा जा रहा है। इसमें क्या न्याय हुआ? मुझे नहीं पता कि वह 16 साल का था या 18 का। मुझे केवल इतना पता है कि उसने जघन्य अपराध किया और सजा के लिए कोई आयुसीमा नहीं होनी चाहिए। आशा देवी ने सार्वजनिक मंच से चार मांगें और उठाईं जिनमें किशोर दोषी समेत पांच आरोपियों को मौत की सजा सुनाई जानी चाहिए, बलात्कार पीड़िताओं को जल्द न्याय दिलाने के लिए सभी अदालतों में फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित की जानी चाहिए, किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन किए जाएं और निर्भया कोष का इस्तेमाल सभी राज्यों में उच्च गुणवत्ता वाली फोरेंसिक प्रयोगशालाएं बनाने में किया जाए।
छात्रा को श्रद्धांजलि देने के लिए जंतर-मंतर पर जावेद अख्तर और शबाना आजमी जैसी हस्तियों के साथ दिल्ली कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी आदि लोग जमा हुए और कई महिला संगठनों ने भी मौजदूगी दर्ज कराई। घटना के बाद जंतर-मंतर एक तरह से लड़की के स्मारक के रूप में तब्दील हो गया था और आज भी उसकी याद में कैंडल लाइट मार्च निकाले गये, प्रार्थना सभाएं आयोजित की गयीं और कई अन्य आयोजन भी हुए।