पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की छापेमारी पर आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि 'सहसा यकीन नहीं होता और यह घोर आश्चर्य का विषय है।' मुख्यमंत्री ने पटना में पत्रकारों से कहा कि किसी भी व्यक्ति के बारे में कोई आरोप हो, तो जांच-पड़ताल होनी चाहिए, लेकिन वगैर किसी आरोप और पूर्व सूचना के मुख्यमंत्री कार्यालय में सीबीआई टीम का घुसना घोर आश्चर्य का विषय है। ममता बनर्जी ने भी छापों का विरोध किया।
नीतीश ने कहा कि जो भी मामले हैं, क्या वे मामले अभी के पदधारक से संबंधित है? अगर पूर्व के मामले हैं तब तो मुख्यमंत्री कार्यालय में सीबीआई का घुसना और भी विचित्र बात है। जांच करने के तो बहुत सारे तरीके हो सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा, "जांच होनी चाहिए, उसमें किसी प्रकार की बाधा भी नहीं होनी चाहिए, लेकिन तरीके से। आज जो कुछ हुआ है वह घोर आपत्तिजनक है।"
माकपा ने छापेमारी की आलोचना की
दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव के कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी को लेकर माकपा ने आज केंद्र सरकार की आलोचना की और इसे काफी निंदनीय करार दिया। पार्टी ने कहा कि गैर भाजपा सरकारों के अधिकारों पर मोदी सरकार के अतिक्रमण में यह नया इजाफा है। माकपा ने कहा कि यह अप्रत्याशित है कि किसी नौकरशाह के खिलाफ जांच के आरोपों के बहाने मुख्यमंत्री का कार्यालय सील कर दिया गया और फाइलों की जांच की गई जैसा कि केजरीवाल ने आरोप लगाया है।
ममता ने कहा, अप्रत्याशित कार्रवाई से वह स्तब्ध
दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि इस अप्रत्याशित कार्रवाई से वह स्तब्ध हैं। वहीं ममता ने ट्वीट किया, मुख्यमंत्री का कार्यालय सील करना अभूतपूर्व है। मैं स्तब्ध हूं। केजरीवाल के दावे से सीबीआई और वित्त मंत्री अरूण जेटली ने राज्यसभा में इंकार किया जहां विपक्ष ने हंगामा किया और कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने एक बयान में कहा कि उनकी पार्टी ने छापेमारी को लेकर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।