नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पंपोर में आतंकियों से लोहा लेते वक्त देश के 5 जबांजों ने अपने प्राणों की आहूति दे दी। शहीद कैप्टर पवन कुमार, शहीद कैप्टर तुषार महाजन, शहीद भोला सिंह, शहीद ओम प्रकाश और शहीद राज सिंह राणा शहीद हो गए। एक बार नहीं सोचा कि उनका भी एक परिवार है, उनका भी कोई इंतजार करता है। आज हर आंख नम है, हर जुंबा कह रही है शहीदों की चिताओं पर हर बरस लगेंगे मेले, वतन पर मरने वालों का बाकी निशां होगा।
आज फिर 5 सपूतों की चिताएं जली हैं। वही सपूत जिन्होंने देश के दुश्मनों से लोहा लेते वक्त अपनी जान भारत माता पर कुर्बान कर दी वही सपूत जो पीछे छोड़ गए है बलिदान की नई कहानी। शहीद कैप्टन पवन कुमार 23 साल के थे शहीद कैप्टन तुषार महाजन 26 साल के थे तो शहीद ओम प्रकाश 32 साल के।
एक मां की शहीद बेटे से आखिरी मुलाकात
जिस बेटे में जान बसती थी, वही बेटा अपनी मां से इतना दूर जा चुका है कि अब लौटेगा नहीं। मां ने जज्बात संभालाने की पूरी कोशिश की,लेकिन लम्हों ने इजाजत नहीं दी। तिरंगे में लिपटे शहीद बेटे कैप्टन तुषार से लिपट गई। आज मां का सिर बेटे के आगे नतमस्तक है।

23 साल के शहीद कैप्टन पवन की वीरगाथा
अभी 23 साल के थे शहीद कैप्टर पवन कुमार, जिन्हें इस उम्र में आखिरी विदाई देनी पड़ेगी देश ने सोचा नहीं था। पूरा शहर भारत माता के इस वीर सपूत की शहादत को सलाम करने सड़कों पर उतरा। पिता की आंख में आंसू जरूर छलके लेकिन बेटे की वीरगाथा पर उन्हें फक्र है,क्योंकि कैप्टन पवन कुमार कुर्बानी की वो कहानी पीछे छोड़ गए है जिसे युगों-युगों तक याद किया जाएगा।
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