
क्या है "करेक्टिव रेप" ?
सबसे पहले "करेक्टिव रेप" शब्द का इस्तेमाल साउथ अफ्रिका में हुआ था जहां यह आम बात है। करेक्टिव रेप को सुविधाजनक बनाने के लिए परिवार के सदस्य ही इसको अंजाम देते हैं।
LGBT समुदाय के लोगों को समाज से मान्यता प्राप्त आचरणों के अनुसार बर्ताव करवाने के लिए "करेक्टिव रेप" को एक सुधारक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
विजयंता ने बताया कि, "करेक्टिव रेप" जैसी घटना के बाद पीड़ित सदमें में आ जाते हैं और वे अपने ही भाई या रिश्तेदारों द्वारा किए गए बलात्कार की घटना को भूला देना ही बेहरत समझते हैं। ऐसी स्थिति में वे अपने परिवार वालों तक से नाता तोड़ लेते हैं। यही वजह है कि ऐसी घटनाएं कभी सामने नहीं आती या कोई इनका ज़िक्र नहीं करता।
उन्होंने बताया कि, दक्षिण भारत के कई समुदायों में खानदान के भाई और बहनों की आपस में शादी होना आम है। कई बार माता-पिता लड़की के जन्म से पहले ही यह तय कर लेते हैं कि वह किससे शादी करेगी। ऐसे में अगर घरवालों को पता चलता है कि लड़की समलैंगिक है तो घर के बुज़ुर्गों के मुताबिक इलाज के लिए जबरदस्ती बनाए गए शारीरिक संबंध से वो ठीक हो जाएगी।
सच्ची घटना पर बन रही है फिल्म 'सत्यवती'
एक हैदराबादी फिल्मकार, दीपथी ताडंकी बेंगलूरू में ऐसी ही हुई एक घटना पर आधारित फिल्म "सत्यवती" बना रही हैं, जो कि सुधारात्मक बलात्कार (करेक्टिव रेप) के संवेदनशील विषय को दर्शाती है।