नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से संविधान के विचारों एवं मूल्यों को बरकरार रखने और ऐसे भारत का निर्माण करने की आज अपील की जिससे इसके संस्थापक पूर्वजों को गर्व महसूस हो।
संविधान दिवस पर देशवासियों को बधाई
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, प्रथम संविधान दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर भारत के लोगों को बधाई। यह दिन आपको हमारे संविधान के बारे में और अधिक जानने के लिए प्रेरित करे।उन्होंने कहा कि यह दिन उन सभी महान महिलाओं एवं पुरूषों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने भारत को एक संविधान देने के लिए अथक काम किया।
डा. भीमराव अम्बेडकर को सलाम
उन्होंने एक और ट्वीट में कहा, आओ, हम हमेशा हमारे संविधान के विचारों और मूल्यों को बरकरार रखें और एक ऐसे भारत का निर्माण करें जिससे हमारे संस्थापक पूर्वजों को गर्व महसूस हो सके।मोदी ने कहा, संविधान का कोई भी जिक्र डा. भीमराव अम्बेडकर के उत्कृष्ट योगदान को याद किए बिना पूरा नहीं हो सकता। मैं उन्हें सलाम करता हूं।
संविधान की खास बातें
भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसमें अब 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं। संविधान में सरकार के संसदीय स्वरूप की व्यवस्था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है। केन्द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख राष्ट्रपति है।
भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्द्रीय संसद की परिषद् में राष्ट्रपति तथा दो सदन है जिन्हें राज्यों की परिषद राज्यसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है। संविधान की धारा 74 (1) में यह व्यवस्था की गई है कि राष्ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगा जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, राष्ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्पादन करेगा। इस प्रकार वास्तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है जो वर्तमान में नरेन्द्र मोदी हैं।
मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभा) के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्येक राज्य में एक विधानसभा है। जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में एक ऊपरी सदन है जिसे विधानपरिषद कहा जाता है। राज्यपाल राज्य का प्रमुख है। प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा तथा राज्य की कार्यकारी शक्ति उसमें विहित होगी। मंत्रिपरिषद, जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री है, राज्यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्पादन में सलाह देती है। राज्य की मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से राज्य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।
संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। अवशिष्ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं। केन्द्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्य क्षेत्र कहा जाता है।