चंडीगढ़: पंजाब सरकार गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का 70 प्रतिशत हिस्सा वहन करेगी। राज्य सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी। राज्य सरकार ने निजी चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद के बाद यह फैसला किया। निजी चीनी मिलों ने 50 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि का पूरा बोझ वहन करने से इनकार कर दिया था। अब इसका 30 प्रतिशत हिस्सा मिलों द्वारा वहन किया जाएगा।
राज्य सरकार ने वर्ष 2021-22 के लिए एसएपी को 310 रुपये से बढ़ाकर 360 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया था। अब निजी चीनी मिलें एसएपी में से 325 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान करेंगी, जबकि शेष 35 रुपये प्रति क्विंटल राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। एक सरकारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और राज्य के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल बैठक में मौजूद थे।
पंजाब में बिजली की दरों में तीन रुपये प्रति यूनिट की कटौती
पंजाब मंत्रिमंडल ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में तीन रुपये प्रति यूनिट की कटौती करने का सोमवार को फैसला किया। राज्य में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले लिये गये इस फैसले से राजकोष पर प्रतिवर्ष 3,316 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह घोषणा की। चन्नी ने यहां मीडिया से कहा, ‘‘हम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में तीन रुपए प्रति यूनिट की कमी कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह लोगों के लिए ‘‘दिवाली का एक बड़ा उपहार’’ है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू होगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, लोग सस्ती बिजली चाहते थे।
बिजली शुल्क में कटौती के फैसले को आप ने बताया ‘चुनावी स्टंट’
पंजाब सरकार के बिजली के शुल्क को कम करने के फैसले को “चुनावी स्टंट” करार देते हुए आम आदमी पार्टी (आप) ने सोमवार को आरोप लगाया कि यह कदम अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतों को “खरीदने” के उद्देश्य से उठाया गया है।
पार्टी मुख्यालय में यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पंजाब में पार्टी के राजनीतिक मामलों के सह-संयोजक राघव चड्ढा ने राज्य के लोगों को भी मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के जाल में न फंसने को लेकर आगाह किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने अपने कार्यकाल के पिछले साढ़े चार वर्षों में विभिन्न मोर्चों पर अपनी विफलताओं को छिपाने और उन्हें “गुमराह व बेवकूफ” बनाकर वोट सुरक्षित करने के लिए चुनाव से कुछ महीने पहले बिजली दरों में कटौती की है।