Viral Video : 22 साल की उम्र में अमेरिका गए एक NRI कपल ने इंस्टाग्राम पर बताया है कि, अमेरिकी सपने को पूरा करने की चाहत ने उन्हें बड़ा कर्जदार बना दिया। कपल ने कहा कि घर की मरम्मत और निवेश संपत्तियों के ज़रिए लाइफस्टाइल को बेहतर बनाना उस समय सामान्य लगता था, लेकिन धीरे-धीरे वर्षों में खर्चा बढ़ता चला गया। बिना सोचे-समझे जीने के कारण उन पर कई मॉर्गेज, रसोई के लिए लोन और क्रेडिट कार्ड के ज़रिए 850,000 डॉलर का भारी कर्ज़ चढ़ गया। अब उन्होंने अगले 1,200 दिनों के भीतर कर्ज़ मुक्त होने का लक्ष्य रखा है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @moneyharmony123 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। कैप्शन में लिखा गया कि, '22 साल की उम्र में, मैं अमेरिकी सपने को पूरा करने के लिए अमेरिका चली गई। एक अच्छी नौकरी। एक घर। एक बेहतर कार। एक नया रसोईघर। छुट्टियां। निवेश के लिए एक संपत्ति।' उन्होंने आगे कहा, 'उस समय इनमें से कोई भी निर्णय गैर-जिम्मेदाराना नहीं लगा। लेकिन अब पीछे मुड़कर देखने पर, हर सामान्य निर्णय से एक और भुगतान, एक और ऋण, एक और मासिक दायित्व जुड़ गया।'
कर्ज का दिया ब्यौरा
कपल का कहना है कि, एक दिन उन्हें एहसास हुआ कि उन पर 850,000 डॉलर (8.4 करोड़ रुपये से ज्यादा) का कर्ज चढ़ गया है। अपने कर्ज का ब्यौरा देते हुए कपल ने बताया, 'मुख्य घर का लोन: 400,000 डॉलर। निवेश संपत्ति का लोन: 270,000 डॉलर। रसोई का लोन: 150,000 डॉलर। क्रेडिट कार्ड का लोन: 30,000 डॉलर।” उन्होंने ये भी कहा कि, 'सबसे अजीब बात क्या है? हमने कभी बैठकर 850,000 डॉलर का कर्ज लेने का फैसला नहीं किया। यह धीरे-धीरे तब हुआ जब हम बिना सोचे-समझे अपनी जिंदगी जी रहे थे।' हालांकि अब उन्होंने अपनी फाइनेंशियल कंडीशन को बेहतर बनाने का ठाना है और अगले 1,200 दिनों के भीतर कर्ज़ मुक्त होने का लक्ष्य रखा है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट को देखने के बाद कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रियाएं दीं, जिनमें से कई लोगों ने अगले तीन वर्षों में अपने लोन चुकाने के दृढ़ संकल्प के लिए एनआरआई दंपति की सराहना की। एक यूजर ने लिखा कि, '1200 दिनों में कर्ज चुकाने के लिए खुद को प्रेरित करना... सराहनीय है।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'अरे वाह, कोई तो सही बात कह रहा है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
ये भी पढ़ें -
'बच्चा परेशान होगा पहले स्कूल जाइए..' कहकर विदेशी बॉस ने जबरदस्ती दी छुट्टी; यूजर्स बोले- 'भारत में संभव नहीं'