नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद सहाराश्री सुब्रत राय को दो बड़े झटके दिए हैं। पहले झटके में कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत को खारिज कर दिया और दूसरे झटके में सहारा श्री को 5000 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी देने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने सहारा को निवेशकों के 36 हजार करोड़ रुपए 9 किश्तों में लौटाने को कहा है। इन नौ किश्तों में सहारा को पहली किश्त 3000 करोड़ रुपए की देनी होगी। गौरतलब है कि सहारा की दो कंपनियों ने वैकल्पिक रुप से परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिए करोड़ों रुपए जुटाए थे।
बैंक गारंटी जमा करने के बाद ही मिलेगी राहत-
कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर देने के बाद अब सहारा को उसी सूरत में जमानत मिल पाएगी जब वो सेबी को बैंक गारंटी जमा करा देंगे। कोर्ट ने खुद कहा है कि सुब्रत राय की रिहाई बैंक गारंटी देने के बाद ही तय होगी। वहीं जमानत मिलने के बाद अगर राय अदालत के आदेशों के नहीं मानते हैं तो उन्हें समर्पण करना होगा। हालांकि राय का पासपोर्ट जमा करा लिया जाएगा और वो विदेश यात्रा नहीं कर पाएंगे...यहां तक कि देश में भी कहीं आने जाने के लिए उन्हें पुलिस को सूचना देनी होगी।
क्या था पूरा मामला-
दरअसल सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर करोड़ों निवेशकों से 17,400 करोड़ रुपए वैकल्पिक रुप से परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिए जुटाए थे। सितंबर 2009 में सहारा प्राइम सिटी ने आईपीओ लाने के लिए सेबी के समक्ष दस्तावेज जमा किए। लेकिन सेबी ने अगस्त, 2010 में दोनों कंपनियों के जांच करने के आदेश दिए थे। इस मामले के कारण सहारा को तिहाड़ जेल जाना पड़ा।