इंदौर: मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने में डॉक्टरों की अरुचि का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निजी क्षेत्र से अपील की कि वह गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को आगे आएं। शिवराज ने इंडियन सोसायटी ऑफ गेस्ट्रोएन्टरोलॉजी के 56वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह में कल रात कहा, डॉक्टरों की कमी हमारे लिए चिंता का विषय है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर काम करने जाना नहीं चाहते। इसके पीछे डॉक्टरों की अपनी दिक्कतें भी हो सकती हैं, जैसे उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए अच्छे संस्थानों और अन्य सुविधाओं का अभाव है।
उन्होंने कहा, हम डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश में सात नए शासकीय मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। लेकिन जब तक सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक खासकर गांवों में स्वास्थ्य समस्याओं का निदान नहीं होगा। इस सिलसिले में निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शुमार है। इस क्षेत्र के विकास और विस्तार के लिए सरकार चिकित्सक समुदाय की विशेष राय लेना चाहती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी शासकीय जिला चिकित्सालयों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही, सूबे के बडे़ सरकारी अस्पतालों में बायपास सर्जरी तथा कीमोथैरेपी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में संस्थागत प्रसव की दर 22 प्रतिशत से बढ़कर 86 प्रतिशत हो गयी है। इससे मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। इंडियन सोसायटी ऑफ गेस्ट्रोएन्टरोलॉजी का राष्ट्रीय अधिवेशन 22 नवंबर तक चलेगा। इसमें देशभर के 2,000 से ज्यादा डॉक्टर भाग ले रहे हैं।