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बाबरी विध्वंस मामले में बरी हुए एलके आडवाणी से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद

पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को बाबरी विध्वंश मामले में सीबीआई की विशेष कोर्ट ने आज बरी कर दिया। ऐसे में अब केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद उनसे मिलने के लिए उनके आवास पहुंचे हैं।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: September 30, 2020 13:47 IST
बाबरी विध्वंस मामले में बरी हुए एलके आडवाणी से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद- India TV Hindi
Image Source : PTI/FILE बाबरी विध्वंस मामले में बरी हुए एलके आडवाणी से मिलने पहुंचे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद

नई दिल्ली: पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को बाबरी विध्वंश मामले में सीबीआई की विशेष कोर्ट ने आज बरी कर दिया। ऐसे में अब केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद उनसे मिलने के लिए उनके आवास पहुंचे हैं। बता दें कि सीबीआई की विशेष कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी सहित मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि यह घटना अचानक हुई थी, कोई पूर्व सुनियोजित साज़िश नहीं थी। आरोपियों के खिलाफ कोई मजबूत साक्ष्य नहीं था, जिससे वह दोष साबित होते हों।

इस केस के फैसले को करीब चार हजार पेज में लिखा गया है। 28 साल चले इस मुकदमें में 351 गवाह पेश किए गए और क़रीब 600 दस्तावेज़ हुए। सीबीआई ने कुल 49 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें 17 की मौत हो चुकी है जबकि बाकि 32 के नाम मुकदमे में थे। अब वह सभी बरी हो गए हैं। सभी आरोपियों को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि जो भी वहां लाखों कारसेवक इकट्ठा हुए थे वे वहां पर सुप्रीम कोर्ट के कारसेवा के आदेश के बाद इकट्ठा हुए थे।

कोर्ट ने कहा है कि ढांचे को गिराए जाने की कोई पूर्व नियोजित साजिश नहीं थी और वहां पर जो नेता इकट्ठा थे उन लोगों ने उस घटना को रोकने के लिए प्रयास किया था, कोर्ट ने अपनी राय में कहा कि सीबीआई ने जो पेपर की कटिंग दाखिल की है उसका कोई आधार नहीं था कि वे कहां से आई थीं। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि विश्व हिंदू परिषद या संघ परिवार का कोई योगदान नहीं था, कुछ आराजक तत्वों ने ढांचा गिराया था, 12 बजे तक स्थिति सामान्य थी, कुछ अराजक तत्वों ने अराजकता की।

मामले के जिन 17 आरोपियों का निधन हो चुका है उनमें शिवसेना सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे, विश्व हिंदु परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णुहरी डालमिया, मोरेश्वर सावें, महंत अवैद्यनाथ, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि, बैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, डॉ. सतीश नागर, डीबी राय, रमेश प्रताप सिंह, हरगोविंद सिंह, लक्ष्मी नारायण दास, राम नारायण दास, विनोद कुमार और राजमाता सिंधिया हैं।

वहीं, जिन 32 लोगों के नाम अभी मुकदमे में थे, उनमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर शामिल हैं।

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