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बेहद रोचक है पंजाब नेशनल बैंक के बनने की कहानी, क्या आप जानते हैं

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Feb 22, 2018 01:40 pm IST,  Updated : Feb 22, 2018 01:48 pm IST

12 अप्रैल 1895 को पंजाब के त्योहार बैसाखी से ठीक एक दिन पहले बैंक को कारोबार के लिए खोल दिया गया। पहली बैठक में ही बैंक के मूल तत्वों को स्पष्ट कर दिया गया था। 14 शेयरधारकों और 7 निदेशकों ने बैंक के शेयरों का बहुत कम हिस्सा लिया।

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बेहद रोचक है पंजाब नेशनल बैंक के बनने की कहानी, क्या आप जानते हैं

नई दिल्ली : पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी की चर्चा आज देशभर में हो रही है। यह बैंक चर्चा में तब आई जब इसमें कई हजार करोड़ के घोटाले का मामला सामने आया। आज देशभर में यह बैंक लगभग 7 हज़ार ब्रांच,  करीब 10 हज़ार एटीएम और 70 हज़ार से अधिक कर्मचारियों के साथ अपनी सेवाएं दे रहा है। देश के दूसरे सबसे बड़े इस राष्ट्रीय बैंक के बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। 19 मई 1894 में इसे केवल 14 शेयरधारकों और 7 निदेशकों के साथ शुरू किया गया था। इसमें सबसे अहम भूमिका स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय ने निभाई थी।

दरअसल लाला लाजपत राय इस बात से काफी चिंतित थे कि ब्रिटिश बैंकों और कंपनियों को चलाने के लिए भारतीय पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन इसका मुनाफा अंग्रेज़ उठा रहे थे जबकि भारतीयों को महज कुछ ब्याज मिला करता था। उन्होंने आर्य समाज के राय बहादुर मूल राज के साथ एक लेख में अपनी इस भावना का इजहार किया। खुद मूल राज भी लंबे समय से यह विचार रखते थे कि भारतीयों का अपना राष्ट्रीय बैंक होना चाहिए।

बैंक की स्थापना कैसे हुई?

राय मूल राज के अनुरोध पर लाला लाजपत राय ने चुनिंदा दोस्तों को एक चिट्ठी भेजी जो स्वदेशी भारतीय ज्वाइंट स्टॉक बैंक की स्थापना में पहला कदम था। इस पर संतोषजनक प्रतिक्रिया मिली। इंडियन कंपनी एक्ट 1882 के अधिनियम 6 के तहत 19 मई 1894 को पीएनबी की स्थापना हो गई। बैंक का प्रॉस्पेक्टस ट्रिब्यून के साथ ही उर्दू के अख़बार-ए-आम और पैसा अख़बार में प्रकाशित किया गया। 23 मई को संस्थापकों ने पीएनबी के पहले अध्यक्ष सरदार दयाल सिंह मजीठिया के लाहौर स्थित निवास पर बैठक की और इस योजना के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया। उन्होंने लाहौर के अनारकली बाज़ार में पोस्ट ऑफिस के सामने और प्रसिद्ध रामा ब्रदर्स स्टोर्स के पास एक घर किराए पर लेने का फ़ैसला किया।

लाहौर से शुरुआत
12 अप्रैल 1895 को पंजाब के त्योहार बैसाखी से ठीक एक दिन पहले बैंक को कारोबार के लिए खोल दिया गया। पहली बैठक में ही बैंक के मूल तत्वों को स्पष्ट कर दिया गया था। 14 शेयरधारकों और 7 निदेशकों ने बैंक के शेयरों का बहुत कम हिस्सा लिया। लाला लाजपत राय, दयाल सिंह मजीठिया, लाला हरकिशन लाल, लाला लालचंद, काली प्रोसन्ना, प्रभु दयाल और लाला ढोलना दास बैंक के शुरुआती दिनों में इसके मैनेजमेंट के साथ सक्रिय तौर पर जुड़े हुए थे। बैंक में महात्मा गांधी समेत लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरु, जलियांवाला बाग कमेटी के भी खाते थे।

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