सीवान: बिहार का सीवान एक बार फिर सुर्खियों में है और वजह है गैंगस्टर और नेता शहाबुद्दीन की रिहाई। सीवान में शहाबुद्दीन का शानदार स्वागत हुआ तो वहीं सीवान का एक परिवार डर कर अपने घर में कैद हो गया। सीवान के उस परिवार में 6 लोग थे लेकिन अब तीन ही बचे हैं। घर के तीन जवान बेटों की हत्या कर दी गई थी और बुजुर्ग मां बाप को अपनी जान का डर सता रहा है। सीवान के इसी परिवार ने शहाबुद्दीन के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है लेकिन एक बार नाउम्मीदी बुजुर्ग दंपत्ति का हौसला तोड़ रही है।
शहाबुद्दीन के खौफ में पीड़ित परिवार
भागलपुर की जेल से जब बिहार का एक नेता समर्थकों के साथ मुस्कुराता हुआ निकला और जिस वक्त सीवान में जश्न की तैयारियां शुरू हो चुकी थी उस वक्त सीवान के एक घर में बुजुर्ग दंपत्ति आंसू बहा रहा था। एक तरफ शहाबुद्दीन जिंदाबाद के नारे लग रहे थे तो उसी वक्त सीवान के एक छोटे से घर ये बुजुर्ग पति पत्नी को अपनी जिंदगी की फिक्र सता रही थी।
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सीवान के चंदा बाबू के घर में जितने लोग जिंदा बचे हैं उतने ही लोगों की हत्या हो चुकी है। बुजुर्ग मां और बाप अपने तीन जवान बेटों की तस्वीर को देखकर जार जार रो रहे थे। चंदा बाबू के तीन बेटों की हैं जिनमें से तीनों की हत्या का आरोप शहाबुद्दीन पर है। 2 बेटों को अगवा करने के बाद तेजाब से नहलाकर मार दिया गया था और जबकि तीसरे और सबसे बड़ा बेटा केस का चश्मदीद गवाह था उसे भी शहाबुद्दीन के लोगों ने सरेआम मार डाला था। अब चंदा बाबू उनकी पत्नी और एक दिव्यांग बेटा बचा है। तीन जवान बेटों को गंवा चुके इस पिता को इंसाफ की उम्मीद थी लेकिन अब वो भी खत्म हो चुकी है।
2 बेटों को तेज़ाब से नहलाकर मारा था
चंदा बाबू और शहाबुद्दीन की अदावत 2004 में शुरू हुई थी। एक दुकान पर कब्जे के लिए विवाद शुरू हुआ था। शहाबुद्दीन के लोगों चंदा बाबू के 2 बेटों को तेज़ाब से नहलाकर मारा था और इस कांड के इकलौते गवाह और बेटे राजीव रौशन की भी 2014 में सरेआम हत्या करवा दी। अब परिवार फिर खौफ में है। शहाबुद्दीन की रिहाई की खबर के बाद से इन लोगों ने बाहर निकलना भी छोड़ दिया है।
न बाहर निकलने की हिम्मत...न पुलिस पर भरोसा
सीवान में शहाबुद्दीन के खिलाफ बोलनेवाला कोई नहीं है। चंदा बाबू ही वो शख्स है जिन्होंने शहाबुद्दीन के खिलाफ कानूनी जंग लड़ी और लड़ते आ रहे हैं लेकिन जब शहाबुद्दीन खुद सीवान में मौजूद हो तो ऐसे में ये लड़ाई काफी मुश्किल हो गई है।
चंदा बाबू को सुरक्षा के लिए सरकार की तरफ से तीन गार्ड दिए गए हैं लेकिन सीवान में रहते हुए चंदा बाबू को 2001 का वो वाकया भी याद है जब पुलिस अफ़सर की पिटाई पर कार्रवाई करते हुए पुलिस प्रतापपुर पहुंची तो उसका सामना शहाबुद्दीन की असल ताकत से हुआ था। शहाबुद्दीन समर्थक और पुलिस के बीच करीब तीन घंटे गोलीबारी हुई थी। 2 पुलिसकर्मियों के साथ 8 ग्रामीण मारे गए, लेकिन प्रतापपुर गांव में पुलिस कदम नहीं रख पाई थी।
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