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‘खजुराहो की नग्न मूर्तियों को साड़ी पहनाए जाने का इंतजार है’

 Written By: Bhasha
 Published : Jan 25, 2016 08:23 am IST,  Updated : Jan 25, 2016 08:23 am IST

देश में बढ़ती असहिष्णुता का विरोध कर रहीं मशहूर लेखिका नयनतारा सहगल ने कहा कि वह उस दिन का इंतजार कर रही हैं जब संस्कृति मंत्री खजुराहो की नग्न मूर्तियों को साड़ी पहनाएंगे।

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कोलकाता: देश में बढ़ती असहिष्णुता का विरोध कर रहीं मशहूर लेखिका नयनतारा सहगल ने कहा कि वह उस दिन का इंतजार कर रही हैं जब संस्कृति मंत्री खजुराहो की नग्न मूर्तियों को साड़ी पहनाएंगे। सहगल ने टाटा स्टील कोलकाता साहित्य उत्सव में कहा, हिंदुत्व के तहत जिस तरीके से चीजें आगे बढ़ रही हैं मैं उस दिन का इंतजार कर रही हूं जब संस्कृति मंत्री खजुराहो की नग्न मूर्तियों को साड़ी पहनाएंगे क्योंकि वे काफी नाटकीय अंदाज में यौन भंगिमाएं हैं। 88 वर्षीय सहगल ने कहा कि असहमति का स्थान खत्म होता जा रहा है और विरोध जताने वालों पर लाठी, पत्थर, काले रंग से हमला किया जा रहा है और हत्या तक कर दी जा रही है।

उन्होंने कहा, सरकार की चुप्पी ही उसका जवाब है। या वह हिंदुत्व की विचारधारा को बचाने में व्यस्त है। भीड़ धमकी, बंदूक और हिंसा से निर्णय कर रही है कि किस चीज पर प्रतिबंध लगेगा। अपना साहित्य सम्मान वापस नहीं लेने पर दृढ़ता से कायम नयनतारा सहगल ने कहा कि पुरस्कार वापसी अभियान खासा कामयाब रहा और असहिष्णुता के खिलाफ लेखकों का विरोध जारी है। साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवासराव को लिखे एक पत्र में उन्होंने लिखा मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि मैंने किसी भी हाल में अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगातार हमलों के खिलाफ मेरा और अन्य लेखकों का विरोध जारी है।

पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 88 वर्षीय भांजी अक्तूबर 2015 में पुरस्कार वापसी अभियान की पहल करने वालों में थीं। यह पूछे जाने पर कि अपनी आवाजें पहुंचाने में लेखक कितना कामयाब रहे, सहगल ने पीटीआई भाषा से कहा कि इसका पहले ही खासा असर हो चुका है क्योंकि न सिर्फ लेखक बल्कि पूरा देश प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहासकार, वैग्यानिक, समाज शास्त्री, फिल्मी सितारे, फिल्मकार, हर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा है। उन्होंने टाटा स्टील कोलकाता लिटररी मीट में असहिष्णुता के मुद्दे पर कहा, सिर्फ सरकार ही प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। क्योंकि सरकार हिन्दुत्चवादी सरकार है जिसने सभी असहमति पर रोक लगा दी है। वे इसे :अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: रोक नहीं सकते क्योंकि हम बोलेंगे, लेकिन वे हमें दंडित करेंगे।

अपने पत्र में सहगल ने याद दिलाया कि कन्नड़ लेखक एम एम कलबुर्गी और उससे पहले महाराष्ट्र में नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्या पर अकादमी की चुप्पी के खिलाफ उन्होंने अपना पुरस्कार वापस किया था। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अकादमी ने कुछ विचार किया है क्योंकि उसके पत्र में लिखा हुआ है कि अकादमी में लौटाये गये पुरस्कारों को स्वीकार करने की कोई नीति नहीं है। सहगल ने अपने पत्र में लिखा है यह बहुत अजीब है क्योंकि अकादमी ने नीति बताने में इतने महीने लगा दिये। मैंने अक्तूबर में आपको जो चेक भेजा था वो अब तक किसी हालत में मान्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर वे लोग अब अमान्य चेक लौटा रहे हैं तो ये उनका :अकादमी का: निर्णय है ना कि मेरा।

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