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देश की पहली वंदे भारत फ्रेट ईएमयू ने पास किया इमरजेंसी ब्रेकिंग टेस्ट, चार दौर में परखी गई क्षमता

 Reported By: Anamika Gaur Written By: Malaika Imam
 Published : Aug 04, 2026 11:54 pm IST,  Updated : Aug 05, 2026 12:01 am IST

कोटा मंडल में देश की पहली वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू (सुपरफास्ट पार्सल रेक) का इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

देश की पहली फ्रेट वंदे भारत ने दिखाया दम- India TV Hindi
देश की पहली फ्रेट वंदे भारत ने दिखाया दम Image Source : REPORTER INPUT

देश की पहली वंदे भारत प्लेटफॉर्म आधारित फ्रेट ईएमयू (सुपरफास्ट पार्सल रेक) के तकनीकी परीक्षणों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के लबान-गुड़ला रेलखंड पर रेक का इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (ईबीडी) परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया। परीक्षण के दौरान सूखी और गीली दोनों प्रकार की पटरियों पर रेक की ब्रेकिंग क्षमता का आकलन किया गया।

चार फेरों में हुआ परीक्षण, तीनों ब्रेकिंग सिस्टम की हुई जांच

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी सौरभ जैन ने बताया कि यह परीक्षण चार फेरों में किया गया। रेक में उपलब्ध तीनों इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम- लोको ब्रेक, ट्रेन ब्रेक और पुश बटन ब्रेक का अलग-अलग परिस्थितियों में परीक्षण किया गया। प्रत्येक परीक्षण में ब्रेक लगाए जाने के बिंदु से लेकर ट्रेन के पूरी तरह रुकने तक की दूरी का सटीक मापन किया गया, जिससे ब्रेकिंग प्रणाली की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया जा सके।

आरडीएसओ और आईसीएफ के विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुआ परीक्षण

उन्होंने बताया कि यह परीक्षण अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के तत्वावधान में किया जा रहा है। परीक्षण के दौरान आरडीएसओ के निदेशक (टेस्टिंग) अनन्जय मिश्रा, आईसीएफ चेन्नई के सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर सुधांशु कुमार, मुख्य लोको निरीक्षक रामनिवास मीना, यातायात निरीक्षक महेंद्र सिंह मीणा सहित आरडीएसओ और आईसीएफ के तकनीकी विशेषज्ञ एवं लोको क्रू मौजूद रहे।

बता दें कि कोटा मंडल में 29 जुलाई 2026 से देश की पहली वंदे भारत फ्रेट ईएमयू के विभिन्न तकनीकी परीक्षण किए जा रहे हैं। इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस परीक्षण की सफलता को रेक के परिचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए मैंग्रोव काटने की मंजूरी

एक अन्य खबर में, बंबई हाई कोर्ट ने मंगलवार को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर 13 किलोमीटर लंबी विद्युत लाइन के निर्माण के लिए मैंग्रोव के पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि यह परियोजना 'राष्ट्रीय महत्व' की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने कहा कि पालघर जिले के दहानू से अंबरसेराई के बीच विद्युत लाइन बिछाने के लिए मैंग्रोव क्षेत्र के उपयोग में बदलाव और पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव की सक्षम अधिकारियों ने जांच कर मंजूरी दे दी। 

पीठ ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना स्थल से सैकड़ों किलोमीटर दूर सोलापुर जिले में प्रतिपूरक वनीकरण करना केवल आंकड़ों की औपचारिकता पूरी करता है, लेकिन इससे स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन बहाल करने में मदद नहीं मिलती। अदालत ने यह आदेश महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड की याचिका पर दिया। कंपनी ने दहानू सब-स्टेशन से पालघर जिले में प्रस्तावित अंबरसेराई ट्रैक्शन सब-स्टेशन तक 132 किलोवाट विद्युत लाइन बिछाने के लिए मैंग्रोव के पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी। करीब 13 किलोमीटर लंबी यह लाइन कुछ हिस्सों में मैंग्रोव वन भूमि और निजी वन क्षेत्र से होकर गुजरेगी और इससे हाई-स्पीड रेल प्रणाली को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

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