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कोरोना वायरस को लेकर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के आंकड़ों में भारी अंतर

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 10, 2020 08:29 am IST,  Updated : May 10, 2020 10:19 am IST

केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी किए गए कोरना वायरस से जुड़े आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।

Discrepancies in COVID-19 figures, Discrepancies in COVID-19 figures West Bengal- India TV Hindi
Discrepancies in COVID-19 figures of West Bengal and Union governments. Image Source : PTI REPRESENTATIONAL

कोलकाता: केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जारी किए गए कोरना वायरस से जुड़े आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। बंगाल सरकार पर आंकड़ों को छिपाने और हालात को न संभाल पाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस बीच राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा शनिवार को जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार राज्य में अब तक कोविड-19 के 1,786 संक्रमण के मामले आए हैं और वायरस संक्रमित 171 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि अधिकारियों ने केवल 99 मौत संक्रमण के कारण होने की बात कही है और बाकी में अन्य गंभीर बीमारियों को वजह बताया गया है।

दूसरी तरफ केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार राज्य में मृतक संख्या 160 और कुल संक्रमण के मामलों की संख्या 1,678 बताई गयी है। इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों की संख्या राज्य सरकार के आंकड़ों से ज्यादा बताई थी। लेकिन पिछले 4 दिन से चक्र बदल गया है और अब राज्य द्वारा बताए जा रहे आंकड़े ज्यादा हैं। पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार के आंकड़ों में विसंगतियों के बारे में पूछे जाने पर स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार नियमित आधार पर सभी आंकड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को दे रही है। 

उन्होंने कहा, ‘हम सारा डेटा केंद्र से साझा कर रहे हैं। वे वेबसाइट पर क्या डाल रहे हैं, यह उन पर निर्भर करता है। हम इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते।’ केंद्र सरकार ने पिछले दिनों राज्य में कोविड-19 से निपटने को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा था। केंद्र ने इसके लिए राज्य की आबादी की तुलना में जांच की बहुत कम दर और देश में 13.2 प्रतिशत की सर्वाधिक मृत्यु दर का उदाहरण दिया। हालांकि राज्य सरकार ने कहा था कि शुरुआत में बुनियादी ढांचे की कमी की वजह से ऐसे कम मामलों का पता चला था और इसकी वजह से राज्य में मृत्यु दर अधिक रही।

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