नई दिल्ली: भारत जैसे बड़े देश में अधिकांश लोग अपनी बीमारी से निजात पाने के लिए अस्पताल में भर्ती होते हैं। वहीं बीमार व्यक्ति का ख्याल रखने के लिए भी काफी सारे तीमारदार अस्पताल में मौजूद रहते हैं जिन्हें प्रतिदन डॉक्टरों नर्सों और वार्ड ब्वॉय से दो-चार होना पड़ता है। लेकिन इन सबों में एक बात बेहद खास होती है और वो यह कि हिंदुस्तान के तमाम अस्पतालों में काम करने वाली नर्सें फिर वो चाहे सरकारी हों या प्राइवेट साउथ इंडिया यानी दक्षिण भारत से ही होती हैं। क्या आपने कभी यह सोचने और समझने की कोशिश की है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। तमाम लोगों की यह जिज्ञासा होती है कि वो जाने कि आखिर हर अस्पताल में साउथ इंडिया की ही नर्सें क्यों दिखती है। आज हम अपनी खबर के जरिए ऐसे ही लोगों के इस सवाल का वाजिब जवाब देने की कोशिश करेंगे। तो पढ़िए आखिर ऐसा क्यों होता है।
क्या है कारण:
भारतीय अस्पतालों में अधिकांशत: साउथ इंडिया (दक्षिण भारत) की नर्सें इसलिए दिखती हैं क्योंकि भारत के दक्षिणी राज्य जैसे कि केरल, तमिलनाडु में नर्सिंग के तमाम कॉलेज हैं। आकंड़ों के मुताबिक साउथ इंडिया में भारत के अन्य हिस्सों से ज्यादा नर्सिंग कॉलेज हैं।
इस बात की गवाही देते हैं ये आंकड़े
| राज्य का नाम | नर्सिंग संस्थानों की संख्या |
| आंध्रप्रदेश | 16 |
| असम | 4 |
| छत्तीसगढ़ | 5 |
| दिल्ली | 8 |
| गुजरात | 2 |
| हरियाणा | 13 |
| जम्मू एवं कश्मीर | 4 |
| कर्नाटक | 27 |
| केरल | 53 |
| महाराष्ट्र | 7 |
| ओडिशा | 8 |
| पंजाब | 18 |
| तमिलनाडु | 81 |
| उत्तराखंड | 4 |
| उत्तर प्रदेश | 17 |
| पश्चिम बंगाल | 13 |
क्यों केरल से होती हैं अधिकांश नर्से?
इसका एक और कारण यहां के लोगों का माइंडसेट भी है। इससे पहले यह माना जाता था कि नर्स बनना समाज के सामने एक बेहतर उदाहरण नहीं होता है, लेकिन दक्षिणी राज्यों मे इस व्यवहार में अहम बदलाव देखने को मिला है। अधिकांश नर्सें केरल से इसलिए भी होती हैं क्योंकि दक्षिणी राज्यों के परिवार अपनी लड़कियों को नर्से बनने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही इनमें अपने मरीजों के प्रति गजब का सेवा भाव होता है।
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