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फिर शर्मशार हुई इंसानियत, एम्बुलेंस नहीं मिली तो हड्डियां तोड़कर पोटली में डाली लाश

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 26, 2016 11:18 am IST,  Updated : Aug 26, 2016 11:18 am IST

नई दिल्ली: ओडिशा से एक बार फिर इंसानियत को शर्मशार करने वाली खबर आई।

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नई दिल्ली: ओडिशा से एक बार फिर इंसानियत को शर्मशार करने वाली खबर आई। मामला बालासोर जिले की है। यहां गुरूवार को अस्पताल वालों के मोर्चरी वैन देने से इनकार करने के बाद रेलवे पुलिस ने महिला के मृत शरीर की हड्डियां तोड़कर, उसकी गठरी बनाकर बांस के डंडे और मजदूरों के जरिये उसे ढोकर स्टेशन पहुंचाया गया।

पहले, बुधवार को कालाहांडी का एक आदिवासी शख्सं पत्नी  की लाश को कंधे पर ले जाता नजर आया, क्यों कि उसके पास गाड़ी करने को रुपए नहीं थे, और अस्पसताल ने कोई इंतजाम करने से मना कर दिया था।

80 वर्षीय सलमानी बेहरा की बालासोर सोरो रेलवे स्टेशन के पास मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई थी। सलमानी के मृत शरीर को सोरो कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया। रेलवे पुलिस को भी इस दुर्घटना की सूचना दे दी गई थी लेकिन वो लोग भी 12 घंटे बाद ही अस्पताल पहुंचे। रेलवे पुलिस के सब इन्स्पेक्टर प्रताप रूद्र मिश्रा के मुताबिक शरीर को पोस्टमार्टम के लिए बालासोर जिला अस्पताल ले जाना ज़रूरी था लेकिन अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी।

मिश्रा ने कई ऑटो वालों से लाश को रेलवे स्टेशन तक ले चलने के लिए कहा जिससे डेड बॉडी को ट्रेन के जरिये बालासोर ले जाया जा सके। मिश्रा का कहना है कि कोई भी ऑटो वाला इसके लिए तैयार नहीं था और जो तैयार थे वो 3500 रुपए मांग रहे थे लेकिन उन्हें इस काम के लिए सिर्फ 1000 रुपए खर्च करने का आदेश था।

इसके बाद मिश्रा ने कुछ मजदूरों को लाश को ढो कर ले जाने के लिए कहा। मजदूर इस लाश को एक बांस के डंडे में बांध कर ले जाना चाह रहे थे लेकिन देरी होने की वजह से, लाश अकड़ गई थी जिसकी वजह से  मजदूरों को लाश बांधने में परेशानी हो रही थी। इसलिए उन्हों ने कूल्हे  के पास से लाश को तोड़ दिया, उसके बाद उसे पुरानी चादर में लपेटा, एक बांस से बांधा और दो किलोमीटर दूर स्थित रेलवे स्टेसशन ले गए। उसके बाद लाश को ट्रेन से ले जाया गया।

बेहड़ा के बेटे, रबिंद्र बरीक ने कहा कि जब उन्हों ने अपने मां की लाश के साथ किए गए व्यदवहार के बारे में सुना तो वह आश्चबर्यचकित रह गए। उन्होंने कहा, ”उन्हें थोड़ी और मानवता दिखानी चाहिए थी। मैंने शुरू में पुलिसवालों के खिलाफ मुकदमा करने की सोची, लेकिन हमारी शिकायत पर कार्रवाई कौन करेगा।”

मामले का स्वेत: संज्ञान लेते हुए ओडिशा मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन बीके मिश्रा ने गुरुवार को आईजी, जीआरपी और बालासोर जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर कहा है कि वे घटना की जांच के आदेश दें और चार सप्ताह में रिपोर्ट सौंपे।

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