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Chandrayaan-3: चांद पर लंबी रात के बाद अब होने वाला है सूर्योदय, जागने वाले हैं विक्रम और प्रज्ञान

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Sep 20, 2023 10:15 pm IST,  Updated : Sep 21, 2023 06:30 am IST

चंद्रमा पर 14 दिनों तक धूप और 14 दिनों तक अंधेरा रहता है। चंद्रयान मिशन-3 का प्रज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर अभी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद हैं और सूर्योदय होते ही इनके फिर से चार्ज होने की उम्मीद है।

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चंद्रमा पर अब होने वाला है सूर्योदय Image Source : ISRO

Chandrayaan-3:  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने चंद्रयान -3 मिशन के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के साथ फिर से संचार स्थापित करने की तैयारी कर रहा है क्योंकि बुधवार से चांद पर 14 दिनों के बाद सूर्योदय होने वाला है। मिशन चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर फिलहाल चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद हैं। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर की जोड़ी पिछले 15 दिनों से स्लीप मोड में है, लेकिन साउथ पोल यानी शिव शक्ति बिंदु पर सूर्य का प्रकाश आने के साथ ही उनके फिर से एक्टिव होने की उम्मीद है। इसरो ने पहले ही कह दिया था कि दोनों ही सूर्य की रौशनी मिलते ही चार्ज हो जाएंगे और एक्टिव मोड में आ जाएंगे। इसरो ने ट्वीट कर बताया कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में चंद्रयान-3 लैंडिंग स्थल पर सूर्योदय हो चुका है और वे बैटरी के रिचार्ज होने का इंतजार कर रहे हैं। इसरो अधिकारियों ने कहा कि उन्हें विक्रम और प्रज्ञान के साथ फिर से संचार स्थापित होने की उम्मीद है।

इसरो ने किया ट्वीट

आज शिव शक्ति बिंदु पर सूर्योदय होने की उम्मीद है और जल्द ही विक्रम और प्रज्ञान को उपयोगी मात्रा में सूर्य का प्रकाश प्राप्त होगा!

#ISRO अब 22 सितंबर को उनके साथ संचार फिर से स्थापित करने के प्रयास शुरू करने से पहले उनके एक निश्चित तापमान से ऊपर गर्म होने का इंतजार करेगा।

22 सितंबर का है इंतजार

#Chandrayaan3 मिशन के लिए एक बार फिर से सूर्योदय होना एक महत्वपूर्ण क्षण है क्योंकि यह लैंडर और रोवर को कार्य करने के लिए आवश्यक गर्मी प्रदान करेगा। इसरो ने कहा है कि वे 22 सितंबर को संचार प्रयास शुरू करने से पहले तापमान के एक निश्चित स्तर से ऊपर बढ़ने का इंतजार करेंगे। 14 जुलाई, 2023 को लॉन्च किया गया चंद्रयान-3 मिशन पहले ही महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर चुका है। इसने भारत को चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास ऐसा करने वाला पहला देश बना दिया। मिशन का प्राथमिक उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र का पता लगाना है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसमें पर्याप्त मात्रा में जमा हुआ पानी मौजूद है।

अबतक विक्रम और प्रज्ञान ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं

विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर 23 अगस्त को उतरने के बाद से विभिन्न प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने चंद्रमा के आयनमंडल में इलेक्ट्रॉन घनत्व को मापा है और चंद्रमा की सतह के तापमान की रीडिंग ली है। प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर की पहली छवि भी खींची। हालांकि, चांद पर रात होने के बाद उनका परिचालन रुक गया क्योंकि सौर ऊर्जा से चलने वाले दोनों वाहनों की बैटरियां इतनी शक्तिशाली नहीं थीं कि वे सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति में अपने सिस्टम को चालू रख सकें। चंद्रमा पर सुबह होने के साथ, इसरो को उम्मीद है कि यदि दोनों के कल-पुर्जे चांद की 14 दिनों की ठंडी रात में जीवित रहने में सक्षम रखते हैं तो मिशन अपने अभूतपूर्व अन्वेषण को फिर से शुरू कर सकता है।

विक्रम और प्रज्ञान के साथ सफल पुनः संपर्क इसरो के लिए एक और उपलब्धि होगी, जो अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में इसकी लचीलापन और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन करेगा। जैसा कि दुनिया देख रही है, शिव शक्ति बिंदु पर सूर्योदय चंद्र अन्वेषण में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक हो सकता है।

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