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महिला सहकर्मियों से राखी बंधवाकर IAS अश्वनी कुमार ने दिया बड़ा संदेश, बोले- ‘सुरक्षा का मतलब पाबंदी नहीं’

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Aug 28, 2026 08:17 pm IST,  Updated : Aug 28, 2026 08:17 pm IST

असम के DITEC ने रक्षाबंधन को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल के संदेश के साथ मनाया। 11 महिला सहकर्मियों ने DITEC के निदेशक अश्वनी कुमार को राखी बांधी। अश्वनी कुमार ने इस मौके पर कहा कि सुरक्षा केवल पाबंदियों से नहीं, बल्कि भरोसे, गरिमा, सम्मान और समान अवसरों से सुनिश्चित होती है।

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महिला सहकर्मियों से राखी बंधवाने के बाद ग्रुप फोटो में DITEC के निदेशक अश्वनी कुमार। Image Source : REPORTER INPUT

Highlights

  • DITEC में रक्षाबंधन पर भरोसे, सम्मान और सुरक्षित कार्यस्थल का खास संदेश दिया गया।
  • 11 महिला सहकर्मियों ने DITEC के निदेशक अश्वनी कुमार को राखी बांधी।
  • अश्वनी कुमार ने कहा कि सुरक्षा का मतलब पाबंदी नहीं, हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का मौका देना है।

गुवाहाटी: असम सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार निदेशालय (DITEC) ने रक्षाबंधन का त्योहार एक खास संदेश के साथ मनाया। इस मौके पर सिर्फ भाई-बहन के पारंपरिक रिश्ते की बात नहीं हुई, बल्कि भरोसे, सम्मान, गरिमा, सुरक्षित कार्यस्थल और समान अवसर को भी महत्वपूर्ण बताया गया। समारोह के दौरान DITEC, AITEC एवं CSD सोसाइटी, ePrastuti, eOffice और NIC से जुड़ी 11 महिला सहकर्मियों ने DITEC के निदेशक अश्वनी कुमार, IAS को राखी बांधी। इस कार्यक्रम ने रक्षाबंधन के पारंपरिक भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ ऐसे कार्यस्थल की प्रतिबद्धता भी दिखाई, जो भरोसे, सम्मान, संवेदनशीलता और साझा जिम्मेदारी पर आधारित हो।

‘राखी सिर्फ सुरक्षा का धागा नहीं, भरोसे का रिश्ता है’

इस मौके पर DITEC के निदेशक अश्वनी कुमार ने कहा कि राखी को केवल सुरक्षा के प्रतीक के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भरोसे का रिश्ता भी है और यही भरोसा कार्यस्थल पर भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा,

'राखी सिर्फ सुरक्षा का धागा नहीं है, यह भरोसे का रिश्ता है। यह भरोसा हमारे कार्यस्थलों पर भी दिखाई देना चाहिए, जहां हर महिला खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे और गरिमा तथा आत्मविश्वास के साथ हर अवसर का लाभ उठा सके। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पेशेवर, नेता, नवोन्मेषक, प्रशासक और निर्णय लेने वाली भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में उन्हें बिना डर और पूरे आत्मविश्वास के काम करने का माहौल देना सभी की साझा जिम्मेदारी है।'

‘सिर्फ नियमों से सुरक्षित माहौल नहीं बनता’

अश्वनी कुमार ने कहा कि कार्यस्थल को वास्तव में सुरक्षित और सभी के लिए समान बनाने के लिए गरिमा, सम्मान और अवसरों का लाभ उठाने की आजादी जरूरी है। उन्होंने कहा,

'सुरक्षित और समावेशी कार्यस्थल बनाने के लिए हमें गरिमा, सम्मान और अवसरों का लाभ उठाने की आजादी सुनिश्चित करनी होगी। यह केवल नियम-कायदों से हासिल नहीं किया जा सकता। सुरक्षा और सम्मान की संस्कृति तभी टिकाऊ बनती है, जब हममें से हर व्यक्ति रोजमर्रा के व्यवहार और बातचीत में इन मूल्यों को स्वेच्छा से अपनाए। संस्थानों में आपसी भरोसे और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के लिए रक्षाबंधन एक अच्छा अवसर है।'

'सुरक्षा का मतलब पाबंदी नहीं होना चाहिए'

DITEC निदेशक ने कहा कि रक्षाबंधन की भावना से ऐसा वातावरण बनाने की प्रेरणा मिलनी चाहिए, जहां महिलाएं और सभी सहकर्मी खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन की भावना हमें ऐसा माहौल बनाने के लिए प्रेरित करनी चाहिए, जहां हमारी बहनें, बेटियां और सहकर्मी सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें और अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आत्मविश्वास और आजादी के साथ आगे बढ़ सकें। उन्होंने आगे कहा,

'सुरक्षा का मतलब पाबंदी नहीं होना चाहिए। इसका मतलब ऐसा माहौल तैयार करना होना चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति अपनी क्षमता को पूरी तरह विकसित कर सके।'

कार्यस्थल की सुरक्षा सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कार्यस्थल की सुरक्षा को केवल प्रशासनिक नियम या औपचारिकता नहीं माना जाना चाहिए। यह संस्था की संस्कृति का हिस्सा होना चाहिए। सहकर्मियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार, एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता, समान अवसर और डर या भेदभाव से मुक्त माहौल किसी भी बेहतर और प्रगतिशील संस्था के लिए जरूरी हैं। रक्षाबंधन समारोह में DITEC के साथ AITEC एवं CSD सोसाइटी, ePrastuti, eOffice और NIC से जुड़ी महिला सहकर्मियों की भागीदारी रही।

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