प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने IDFC बैंंक धोखाधड़ी मामले में चल रही जांच के सिलसिले में रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, विक्रम वाधवा को बीते 29 मई को गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और चंडीगढ़ और पंचकुला स्थित दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में मौजूद खातों से 645 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के गबन के मामले में एजेंसी की चल रही जांच के सिलसिले में की गई है।
वाधवा पर क्या आरोप है?
ईडी ने सोमवार को जानकारी दी है कि 645 करोड़ रुपये के गबन से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच में ये तीसरी गिरफ्तारी है। ईडी के अनुसार, वाधवा उन मुख्य आरोपियों में से एक है, जिन्होंने ऋभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके सरकारी धन का गबन किया।
आरोपी को 70 करोड़ रुपये से अधिक रकम मिली
ईडी ने इस मामले में आरोप लगाया है कि गिरफ्तार आरोपी कारोबारी विक्रम वाधवा को अपराध से अर्जित धन के तौर पर 70 करोड़ रुपये से अधिक रकम मिली थी। वाधवा पर धन के सृजन, विभिन्न स्तरों पर उसके लेनदेन तथा उसे छिपाने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। ईडी के मुताबिक, वाधवा को एक स्पेशल कोर्ट के सामने पेश किया गया जहां से उसे दो जून तक चार दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया है।
जांच में क्या पता लगा?
ईडी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, "अब तक जांच में पता लगा है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और चंडीगढ़ और पंचकूला स्थित दो निजी स्कूलों के IDFC फर्स्ट बैंक में अकाउंट्स से 645 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि का गबन किया गया।" इससे पहले अपराध के इस मामले में दो आरोपियों ऋषि और कुमार को 11 मई को गिरफ्तार किया गया था। (इनपुट: भाषा)
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