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'ED सारी हदें पार कर रहा', कानूनी सलाह देने वाले वकीलों को तलब किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

 Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Jul 21, 2025 04:22 pm IST,  Updated : Jul 21, 2025 04:22 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ED की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने ईडी द्वारा वकीलों को कानूनी सलाह देने के लिए समन भेजने पर कहा कि ED हर हद पार कर रहा है, जो वकालत जैसे स्वतंत्र पेशे के लिए खतरनाक है।

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सुप्रीम कोर्ट Image Source : PTI

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जांच के दौरान कानूनी सलाह देने या मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तलब करने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सोमवार को कहा कि ईडी ‘‘सारी हदें पार कर रहा है’’। कोर्ट ने इस संबंध में दिशानिर्देश बनाने की जरूरत भी रेखांकित की। प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह टिप्पणी विधिक पेशे की स्वतंत्रता पर इस तरह की कार्रवाइयों के प्रभावों पर ध्यान देने के लिए अदालत द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई एक सुनवाई के दौरान की। 

कोर्ट की टिप्पणी ED द्वारा सीनियर वकील अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को तलब किए जाने के बाद आई है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘एक वकील और मुवक्किलों के बीच का संवाद विशेषाधिकार प्राप्त संवाद होता है और उनके खिलाफ नोटिस कैसे जारी किए जा सकते हैं...वे सारी हदें पार कर रहे हैं।’’

सीनियर वकीलों को मिले नोटिस

शीर्ष अदालत को यह बताया गया था कि वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार जैसे बड़े नामों को हाल में ईडी द्वारा नोटिस जारी किया गया और इससे कानून के पेशे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस संबंध में दिशानिर्देश तैयार किए जाने चाहिए।’’

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मुद्दे को उच्चतम स्तर पर उठाया गया है और जांच एजेंसी को वकीलों को कानूनी सलाह देने के लिए नोटिस जारी नहीं करने के लिए कहा गया है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘‘वकीलों को कानूनी सलाह देने के लिए तलब नहीं किया जा सकता।’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि झूठे विमर्श गढ़कर संस्थानों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

वकीलों ने क्या कहा?

वकीलों ने जोर देकर कहा कि वकीलों को खासकर विधि संबंधी राय देने के लिए तलब करना एक खतरनाक नजीर तय कर रहा है। एक वकील ने कहा, ‘‘अगर यह जारी रहा तो यह वकीलों को ईमानदार और स्वतंत्र सलाह देने से रोकेगा।’’ उन्होंने कहा कि जिला अदालतों के वकीलों को भी बेवजह परेशान किया जा रहा है। अटॉर्नी जनरल ने चिंताओं को स्वीकार किया और कहा, ‘‘जो हो रहा है वह निश्चित रूप से गलत है।’’ प्रधान न्यायाधीश ने इस पर कहा कि अदालत भी इस तरह की रिपोर्ट से हैरान है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने मीडिया की खबरों के आधार पर राय बनाने के ख़िलाफ आगाह किया। विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘संस्थाओं को निशाना बनाने की एक सुनियोजित कोशिश चल रही है। कृपया साक्षात्कारों और खबरों पर भरोसा नहीं करें।’’

प्रधान न्यायाधीश क्या बोले?

प्रधान न्यायाधीश पिछले सप्ताह अस्वस्थ रहने के कारण अदालती कार्यवाहियों से दूर थे। उन्होंने कहा, ‘‘हम खबरें नहीं देखते, न ही यूट्यूब पर इंटरव्यू देखते हैं। पिछले हफ्ते ही मैं कुछ फिल्में देख पाया।’’ जब सॉलिसिटर जनरल ने घोटालों में आरोपी नेताओं द्वारा जनमत को प्रभावित करने का प्रयास किए जाने का जिक्र किया, तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमने कहा था...इसका राजनीतिकरण नहीं करें।’’ मेहता ने कहा, ‘‘जैसे ही मैंने श्री दातार के बारे में सुना, इसे तत्काल सर्वोच्च कार्यपालक अधिकारी के संज्ञान में लाया।’’ (भाषा इनपुट्स के साथ)

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