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क्लासमेट्स टू काउंटर पार्ट: भारत-ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंधों को मजबूत बनाता है Alumni Connect

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Niraj Kumar
 Published : Aug 10, 2025 03:04 pm IST,  Updated : Aug 10, 2025 03:04 pm IST

ये एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं, तो वे न केवल पेशेवर क्षमता विकसित करते हैं, बल्कि एक-दूसरे के देशों, संस्कृतियों और सशस्त्र बलों की गहरी, व्यक्तिगत समझ भी विकसित करते हैं।

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जनरल उपेंद्र द्विवेदी और जनरल स्टुअर्ट Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली:  रक्षा कूटनीति के क्षेत्र में मिलिट्री लीडर्स के बीच साझा प्रशिक्षण अनुभव अक्सर स्थायी साझेदारियों के बीज बोते हैं। यह राजनीतिक चक्रों और रणनीतिक बदलावों के बावजूद लंबे समय तक टिके रहते हैं। जब सैन्य कमांडर अपने प्रारंभिक या मध्य-कैरियर चरणों में एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं, तो वे न केवल पेशेवर क्षमता विकसित करते हैं, बल्कि एक-दूसरे के देशों, संस्कृतियों और सशस्त्र बलों की गहरी, व्यक्तिगत समझ भी विकसित करते हैं। यह "पूर्व छात्र संपर्क" रणनीतिक सॉफ्ट पावर का एक अनूठा साधन बन जाता है, जो विश्वास का निर्माण करता है, स्पष्ट संवाद को सुगम बनाता है और शांति और संकट दोनों समय में निर्बाध सहयोग को सक्षम बनाता है। ऑस्ट्रेलियाई सेना के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल साइमन स्टुअर्ट की आगामी 10 से 14 अगस्त 2025 की यात्रा इस सिद्धांत का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी और जनरल स्टुअर्ट की साथ-साथ ट्रेनिंग

भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और लेफ्टिनेंट जनरल स्टुअर्ट ने वर्ष 2015 में यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी वॉर कॉलेज में एक साथ प्रशिक्षण लिया और एक पेशेवर बॉन्ड स्थापित किया जो उनके करियर के साथ-साथ परिपक्व हुआ है। यह साझा शैक्षणिक पृष्ठभूमि न केवल आपसी विश्वास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है, बल्कि एक गहरी रणनीतिक समझ को भी सक्षम बनाती है, जिससे दोनों सेनाओं के बीच अधिक सार्थक सहयोग का मार्ग प्रशस्त होता है। भारत के प्रमुख सैन्य संस्थान जैसे भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC), रक्षा सेवा स्टाफ महाविद्यालय (DSSC), और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) दशकों से मित्र देशों (FFC) के अधिकारियों का स्वागत करते रहे हैं। इनमें से कई पूर्व छात्र अपनी सेनाओं में सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं और भारत के पेशेवर लोकाचार के वर्दीधारी राजदूत बन गए हैं। 

भारत में प्रशिक्षित अधिकारी

  1. श्रीलंका - वर्तमान और सेवानिवृत्त प्रमुखों सहित 8 वरिष्ठ अधिकारी,
  2. नेपाल - 9 वरिष्ठ अधिकारी।
  3. बांग्लादेश - 6 वरिष्ठ अधिकारी।
  4. मलेशिया - 6 वरिष्ठ अधिकारी।
  5. भूटान - 2 वरिष्ठ अधिकारी।
  6. नाइजीरिया - 3 वरिष्ठ अधिकारी।
  7. ऑस्ट्रेलिया - 2 वरिष्ठ अधिकारी।

 पूर्व छात्र नेटवर्क कैसे काम करता है?

इनमें श्रीलंकाई सेना प्रमुख, IMA और स्कूल ऑफ आर्टिलरी के पूर्व छात्र, और श्रीलंकाई CDS, NDC के स्नातक शामिल हैं। भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव, फ्रांस, तंजानिया, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, नामीबिया, केन्या, फिजी और थाईलैंड आदि देशों के प्रमुख और वरिष्ठ कमांडर भी भारतीय सेना के साथ इस साझा बॉन्ड को शेयर करते हैं। यह पूर्व छात्र नेटवर्क दोनों तरफ से काम करता है। भारतीय अधिकारियों ने भी आर्मी वॉर कॉलेज (अमेरिका), रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज (यूके), इकोले डे गुएरे (फ्रांस) जैसे प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों में शिक्षा प्राप्त की है, जिससे उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण के साथ-साथ विदेशों में अपने साथियों के साथ स्थायी संबंध बनाने में भी मदद मिली है।

यह एकतरफा आदान-प्रदान नहीं है। भारतीय सेना के अधिकारी स्वयं विदेशों में पेशेवर सैन्य शिक्षा से प्रभावित हुए हैं—फील्ड मार्शल केएम करियप्पा और एसएचएफजे मानेकशॉ इंपीरियल डिफेंस कॉलेज, ब्रिटेन के पूर्व छात्र थे, जबकि जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आर्मी वॉर कॉलेज, अमेरिका में शिक्षा प्राप्त की थी। इस तरह के आदान-प्रदान अधिकारियों को व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण, परिचालन संबंधी सर्वोत्तम प्रथाओं और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा और गहरी समझ से लैस करते हैं।

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