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कहां छिपा है 'व्हाइट कॉलर' टेरर मॉड्यूल का 'चीफ'? रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी में पुलिस

जम्मू-कश्मीर पुलिस इंटरपोल के जरिए ‘व्हाइट कॉलर’ टेरर मॉड्यूल के मुखिया डॉ. मुजफ्फर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट और फरीदाबाद डॉक्टर मॉड्यूल से जुड़े इस नेटवर्क का संचालन वह दुबई और अफगानिस्तान से करता था।

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
Published : Nov 15, 2025 02:45 pm IST, Updated : Nov 15, 2025 02:50 pm IST
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Image Source : REPORTER INPUT डॉक्टर मुजफ्फर।

नई दिल्ली/श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर पुलिस 'व्हाइट कॉलर' टेरर मॉड्यूल का पूरी तरह पर्दाफाश करने के लिए  CBI के माध्यम से इंटरपोल से मदद ले रही है। पुलिस इस मॉड्यूल के अहम सदस्य माने जा रहे डॉ. मुजफ्फर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है। डॉ. मुजफ्फर काजीगुंड का रहने वाला है और इंटरस्टेट 'व्हाइट कॉलर' टेरर मॉड्यूल में उसका रोल काफी बड़ा माना जा रहा है। एजेंसियों का मानना है कि मुजफ्फर ही इस टेरर नेटवर्क का मुखिया है। उसकी गिरफ्तारी से कई देशों में फैले नेटवर्क के कनेक्शन खुल सकते हैं।

अफगानिस्तान में छिपा है मुजफ्फर?

बता दें कि यह मामला दिल्ली के लाल किला कार ब्लास्ट केस और फरीदाबाद डॉक्टर मॉड्यूल से जुड़ा है। मुजफ्फर डॉ. आदिल का बड़ा भाई है जो दिल्ली के लाल किला कार ब्लास्ट केस में पकड़े गए 8 आरोपियों में से एक है। पूछताछ में पता चला कि मुजफ्फर अगस्त में भारत छोड़कर दुबई गया था। अब माना जा रहा है कि वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। मुजफ्फर भारत के मॉड्यूल और पाकिस्तान के हैंडलर्स के बीच लिंक की तरह काम करता था, और ऑपरेशन अफगानिस्तान से कंट्रोल होता था। वह उकाशा नाम के जैश के हैंडलर के संपर्क में था।

तुर्की कनेक्शन और ब्लास्ट की प्लानिंग

2022 में मुजफ्फर और डॉक्टर मुजम्मिल शकील ने तुर्की की यात्रा की थी। तुर्की में उसकी उकाशा से मुलाकात हुई थी। यहीं पर फंडिंग, ऑपरेशन का रूट और हमले की प्लानिंग को फाइनल किया गया। इसके बाद मुजफ्फर दुबई से बैठकर पूरा नेटवर्क चलाता था। पैसों से लेकर लॉजिस्टिक तक सब कुछ वह संभालता था। भाई आदिल की गिरफ्तारी के बाद मुजफ्फर तुरंत अफगानिस्तान भाग गया। पुलिस के मुताबिक, आदिल को कट्टरपंथ की तरफ धकेलने में मुजफ्फर की बड़ी भूमिका थी। उसी ने आदिल की उमर, मुजम्मिल और मौलवी इरफान से मुलाकात करवाई। एजेंसियों का शक है कि दिल्ली ब्लास्ट का आदेश भी मुजफ्फर ने ही दिया था।

टेलीग्राम ग्रुप और मेडिकल कॉलेज लिंक

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरा मॉड्यूल दो टेलीग्राम ग्रुप से प्रभावित था, जिनसे कट्टरपंथी सामग्री मिलती थी। तुर्की से लौटने के बाद मुजम्मिल फरीदाबाद की यूनिवर्सिटी आया था। आदिल की पोस्टिंग सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में हुई। इसके बाद इस ग्रुप की देशभर में गतिविधियां बढ़ गईं। पुलिस इंटरपोल के जरिए डॉ. मुजफ्फर को पकड़ने की पूरी कोशिश कर रही है, क्योंकि उसकी गिरफ्तारी से कई देशों में फैले नेटवर्क के कनेक्शन खुल सकते हैं।

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