नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को बताया कि एक अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। सुरक्षा बलों ने असम, मिजोरम और मणिपुर से 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने उस टीम को बधाई दी, जिसमें केंद्रीय एजेंसियों के सदस्य और तीनों राज्यों के पुलिसकर्मी शामिल थे। सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'X' पर 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' नाम के इस अभियान के बारे में उन्होंने जानकारी दी। अमित शाह ने बताया कि यह नेटवर्क 'डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर' के जरिए भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के पार नशीले पदार्थों की तस्करी करता था।
38 जगहों पर एक साथ छापेमारी
एक्स पर अपनी पोस्ट में अमित शाह ने कहा कि यह ऑपरेशन 31 दिसंबर, 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने के केंद्र सरकार के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश तब तक प्रहार करता रहेगा, जब तक कि नशीले पदार्थों के इन गिरोहों (नार्को-कार्टेल) का पूरी तरह से सफाया नहीं हो जाता। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमारी एजेंसियों ने 23 अक्टूबर को असम, मिजोरम और मणिपुर में 38 जगहों पर एक साथ छापेमारी की और नशीले पदार्थों के एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह को ध्वस्त कर दिया।" उन्होंने आगे कहा, "इस ऑपरेशन में 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला, 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए, 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, और 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया।"
नशीले पदार्थों के खिलाफ भारत की लड़ाई
बता दें कि अमित शाह ने पहले नशीले पदार्थों को भारत की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया था और कहा था कि अगर इसे नहीं रोका गया, तो यह देश की तरक्की को बर्बाद कर सकता है। उन्होंने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार दिसंबर 2029 तक देश को नशा मुक्त बना देगी। 21 अक्टूबर को नई दिल्ली में 'नेशनल पुलिस मेमोरियल' से दिए गए अपने संदेश में, उन्होंने देश भर के पुलिस बलों से अपील की थी कि वे भारत को नशा मुक्त बनाने और इस खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हों।
उन्होंने कहा था कि पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने भारत के विकास में अहम भूमिका निभाई है, जिसमें नक्सलियों से निपटना और नशीले पदार्थों के खिलाफ देश की लड़ाई शामिल है। शाह ने कहा, "ये अमर नायक अपने इस संकल्प पर अडिग रहे कि देश की जमीन का एक इंच भी हिस्सा विदेशी हाथों में नहीं जाना चाहिए, और उन्होंने अपना कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। तब से, हर साल 21 अक्टूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है।" उन्होंने आगे कहा, "कोई सोच भी नहीं सकता कि अगर इन जवानों ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान न दिया होता, तो आज हम कहाँ खड़े होते।"
यह भी पढ़ें-
पंजाब में स्कूटी खड़ा करने को लेकर हुआ विवाद, घर के बाहर युवक की 6 गोली मारकर हत्या