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क्या CJP नेता सौरव दास 'नेपाली' हैं? मद्रास हाई कोर्ट ने जांच के लिए केंद्र को भेजा नोटिस; 6 सप्ताह में देना होगा जवाब

 Written By: Amar Deep
 Published : Oct 30, 2026 06:26 pm IST,  Updated : Oct 30, 2026 06:26 pm IST

कांचीपुरम के एक व्यवसायी ने मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। उन्होंने सीजेपी नेता सौरव दास के कथित तौर पर मूल नेपाल से जुड़े होने की जांच की मांग की। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी और 10 अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है।

सौरव दास की नागरिकता की जांच के लिए हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस।- India TV Hindi
सौरव दास की नागरिकता की जांच के लिए हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस। Image Source : PTI/FILE

चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस सौरव दास की नागरिकता की जांच और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने की मांग वाली एक याचिका पर दी गई है। यह याचिका कांचीपुरम जिले के एक व्यवसायी गणेश कुमार ने दायर की थी। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के राष्ट्रीय सह-संयोजक योगेश शर्मा उर्फ ​​'सौरव दास' और उनके माता-पिता की पृष्ठभूमि और अन्य विवरणों की तुरंत एक विस्तृत, गहन और निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया जाए। अपनी याचिका में गणेश कुमार ने कहा है कि कथित तौर पर दास का मूल नेपाल से जुड़ा है, और इस बात की जांच होनी चाहिए। अगर यह सच साबित होता है, तो "उन्हें हमारी सरकार और हमारी न्यायपालिका के बारे में उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।" उन्होंने दास पर न्यायपालिका के प्रति "अपमानजनक भाषा" इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

'रद्द किया जाए पासपोर्ट और आधार कार्ड'

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि अगर सौरव दास दोषी पाए जाते हैं, तो उनका पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द कर दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ के समक्ष कांचीपुरम जिले के गणेश कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) सुनवाई के लिए आई। कोर्ट ने केंद्र सरकार, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी और 10 अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है, जिसका जवाब छह सप्ताह के भीतर देना होगा। गणेश कुमार ने अपनी याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार मंत्रालय से यह निर्देश देने की भी मांग की है कि "सौरव दास" नाम के ट्विटर और इंस्टाग्राम हैंडल को ब्लॉक किया जाए। साथ ही, उन्हें न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ आगे कोई भी अपमानजनक बयान देने से रोका जाए। 

संविधान के अपमान का आरोप

गणेश कुमार ने यह भी मांग की कि जब तक यह मामला चल रहा है, तब तक सौरव दास को न्यायपालिका के खिलाफ किसी भी तरह की मानहानिपूर्ण, डराने-धमकाने वाली, अभद्र, अश्लील या अपमानजनक टिप्पणी करने से रोका जाए। इसमें विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और निचली अदालतों के न्यायाधीशों के खिलाफ की जाने वाली व्यक्तिगत टिप्पणियां शामिल हैं। यह रोक सोशल मीडिया सहित किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर लागू होनी चाहिए, चाहे वह सौरव दास खुद करें या उनके किसी दोस्त, सहयोगी, एजेंट या प्रतिनिधि के माध्यम से हो। गणेश कुमार ने कहा कि सौरव दास लगातार न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो अपने आप में संविधान का अपमान है।

फंडिंग की भी जांच की मांग

गणेश कुमार ने कहा कि अगर यह जानकारी सच है कि सौरव दास की जड़ें नेपाल से जुड़ी हैं, तो योगेश शर्मा नाम के इस व्यक्ति ने जानबूझकर इन तथ्यों को छिपाया है और धोखाधड़ी करके भारत में आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट हासिल किया है। उसे न्यायपालिका को अपशब्द कहने का कोई अधिकार नहीं है। राष्ट्रहित में, इस बात की गहराई से जांच होनी चाहिए कि उसने आधार कार्ड और पासपोर्ट कैसे हासिल किया, उसे कहां से फंड मिल रहा था, और वह किन स्रोतों से पैसा पा रहा था। साथ ही, इस बात की भी जांच जरूरी है कि वह किस मकसद से न्यायपालिका के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने आगे कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए, उस खाते की भी निश्चित रूप से जांच होनी चाहिए जहां से उसे फंड मिल रहा था। (इनपुट- PTI)

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